त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। “टूटते रिश्ते, लालच और नशे की त्रासदी को उजागर करता नाटक ‘कनक दी बल्ली’”। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी (सांस्कृतिक कार्य विभाग, चंडीगढ़) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैसाखी महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को प्रसिद्ध नाटककार बलवंत गार्गी के चर्चित नाटक “कनक दी बल्ली” का मंचन सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में किया गया।
नाटक का निर्देशन रंगकर्मी गुरप्रीत सिंह बैंस ने किया, जबकि इसकी डिज़ाइन एवं संकल्पना सुदेश शर्मा द्वारा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हरजिंदर सिंह, अध्यक्ष गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, प्रयागराज, विशिष्ट अतिथि दिलजीत सिंह, जनरल सेक्रेटरी, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, प्रयागराज व केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्वलित कर किया।
नाटक “कनक दी बल्ली” एक मार्मिक कथा है, जिसमें “तारो” नामक युवती के जीवन संघर्ष और उसकी दबी इच्छाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कम उम्र में माता-पिता को खो चुकी तारो अपने लालची और शराबी मामा के साथ रहने को विवश है। उसका प्रेम “बचना” नामक चूड़ियाँ बेचने वाले युवक से होता है, जो उसके जीवन की एकमात्र उम्मीद बन जाता है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब तारो की मासी “ताबा” स्वार्थवश उसका विवाह उम्रदराज़ और धूर्त व्यक्ति “मघर” से करा देती है। मघर पहले से कई विवाह कर चुका है और उसका वर्तमान वैवाहिक जीवन भी असंतोषपूर्ण है। परिस्थितियों से त्रस्त होकर तारो मघर के घर से भागकर बचना के पास पहुँचती है, किंतु सामाजिक विडंबनाएँ और अतीत के रहस्य उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं होने देते।

नाटक के चरम दृश्य में मघर और बचना के बीच संघर्ष होता है, जिसमें बचना की हत्या हो जाती है और तारो की अंतिम उम्मीद भी टूट जाती है। इस प्रकार नाटक यह संदेश देता है कि नशा, लालच और धन की लालसा किस प्रकार सच्चे प्रेम पर भारी पड़ती है। नाटक ने प्रेम, पीड़ा, लालच और सामाजिक विडंबनाओं की ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया।
नाटक में सेट एवं प्रकाश व्यवस्था हरविंदर सिंह द्वारा की गई, जबकि वस्त्र विन्यास भूपिंदर कौर और प्रियंका, मुख्य सज्जा नीना, मंच सामग्री नवदीप बाजवा तथा प्रोडक्शन सौरभ शर्मा, जैकी शर्मा एवं विक्रांत सेठ द्वारा किया गया।
कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। बचना की भूमिका में रवि चौहान, तारो की भूमिका में लवलीन कौर, ताबा की भूमिका में ईशु बाबर तथा निहाली की भूमिका में नेहा धीमान ने विशेष रूप से प्रभावशाली प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में केंद्र निदेशक द्वारा मुख्य अतिथि को पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।










