पार्टी से निकाल बाहर किए जाने तक आज से सतत होगा मेवालाल गौतम का पुतला दहन- आईपी रामबृज गौतम।

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बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम के विरुद्ध जमकर लगे मुर्दाबाद के नारे

त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम मुर्दाबाद, सतीश जाटव मुर्दाबाद, पंकज गौतम मुर्दाबाद, आकाश राव गौतम मुर्दाबाद, मेवालाल गौतम, सतीश जाटव, पंकज गौतम और आकाश राव गौतम को पार्टी से निकाल बाहर करो आदि नारो के साथ सिविल लाइन स्थित धरना स्थल पर जमकर लगे नारे।

बता दे कि मम्फोर्डगंज स्थित बीएसपी के मण्डल कार्यालय पर पहली जनवरी को डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पत्रकार आईपी रामबृज पार्टी के एक शुभचिंतक होने के कारण पार्टी के गिरते जनाधार और वोट प्रतिशत का मूल कारण पर चिंता व्यक्त किया और इसका मुख्य कारण वर्तमान बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम को दोषी माना जिनके विरुद्ध पार्टी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन इस बात को लेकर करने जा रहा था कि यदि बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव को पार्टी से निकाल दिया जाता है तो पार्टी अपने वास्तविक और मूल वोट को प्राप्त करने में सफल हो जाएगी। रामबृज द्वारा बनाई गई रणनीति पार्टी के हित और उत्थान के लिए थी किन्तु प्रदर्शन से पूर्व पार्टी कार्यालय से पांच सौ मीटर पहले कार्यालय मंडलायुक्त के गेट पर पुलिस बल द्वारा मना करने पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के टेलीफोनिक वार्ता के दौरान मिले आश्वासन पर रामबृज ने पार्टी कार्यालय पर न जाकर न तो प्रदर्शन किया गया और न ही पार्टी विरोधी नारे ही लगाएं और न ही पार्टी कार्यालय में बैठे लोगों की कार्यवाही में व्यवधान ही किया बल्कि रामबृज अपने जत्थे के साथ वापस चला आया।

 

 

प्रदर्शन कार्यो ने बताया की आईपी रामबृज के विरुद्ध शिकायतकर्ता और उसके गिरोह के लोग मुख्य मण्डल प्रभारी राजू गौतम और त्रिभुवन नाथ जैसल तथा सतीश कुमार जाटव अपनी रूढ़िवादी, दादागिरी से वशीभूत होकर ईर्ष्या और जलन बस प्रगतिशील कदम का विरोध करते हैं जो पार्टी के हित में न होकर पार्टी के अहित में है। जिसका कारण पार्टी का जनाधार और वोट प्रतिशत खिशक भी रहा है किन्तु उपरोक्त जड़वत लोग अपनी आदत छोड़ने के लिए उद्यत नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम द्वारा 01 जनवरी को दिए गए आश्वासन पर रामबृज ने अपनी सारी गतिविधियां रोक दी थी किन्तु जब तीन दिन के स्थान पर तीन महीने का समय बीत गया तो 03 अप्रैल को लखनऊ स्थित पार्टी के कार्यालय पर पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती जी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक बुलाई गई थी, रामबृज ने लखनऊ पहुंचकर पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की पोस्ट 02 अप्रैल को सोशल मीडिया पर डाली थी किन्तु रामबृज अपने समर्थकों के साथ लखनऊ जाकर विरोध प्रदर्शन किया ही नहीं। इस प्रकार पार्टी के खिलाफ रामबृज और उसके समर्थकों द्वारा कोई कार्यवाही ना करके पार्टी की गतिविधियों में सुधार, संशोधन द्वारा संगठन को सक्रिय सजग करने की गतिविधिया हुई हैं न कि संगठन के विपरीत। फर्जी एफआईआर के आनुषंगिक अवयवों का सख्त अभाव है।

रामबृज ने बताया की एफआईआर में उपरोक्त खड्यंत्रकारियो के अलावा निष्पक्ष गवाह मौके पर नहीं है। रामबृज ने कहा की मेरे द्वारा कोई घटना कारित ही नहीं की गई तो एफआईआर ही व्यर्थ में दर्ज हुई है जिसके कथन में विश्वसनीयता सम्यक ही नहीं है। शिकायतकर्ता ने झूठे वाकयात की एफआईआर रामबृज के विरुद्ध दर्ज कराई और पुलिस बल को हरकत में लाने की कोशिश की है जिसके कारण शिकायत करता के भी विरुद्ध दफा 182 और 211 ताज रात हिन्द के तहत गुनहगार साबित हुआ है। वाकया फ़र्जी, मनगढंत, कपोलकल्पित है इसीलिए उपरोक्त एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट लगवाकर रामबृज के प्रति न्याय बरतने के साथ साथ बीएसपी के गिरते वोट प्रतिशत और जनाधार का मुख्य कारण पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम है जिन्हें निकाल बाहर किए जाने को लेकर डान के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन भी किया और आज से यमुनापार में मेवालाल गौतम को पार्टी से निकाल बाहर किए जाने तक होता रहेगा पुतला दहन।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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