त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। ऐसे तो आजादी पर सभी ध्वजारोहण करते हैं सरकार द्वारा झंडारोहण का नियम बदले जाने के बाद आम नागरिक भी इसमें हिस्सा लेते हैं किंतु शहीदवॉल पर सामूहिक ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा है। इसे इस साल भी निभाया गया।
शहीदवॉल के संस्थापक वीरेंद्र पाठक बताते हैं कि प्रारंभ में अतिथि बुलाकर उनसे ध्वजारोहण कराया जाता था किंतु देखा गया की बहुत सारे ऐसे लोग थे वह ध्वजारोहण करने के गौरव से वंचित रहते थे और उनके मन में महसूस भी रहता था। बराबरी का दर्जा भी सवाल खड़ा करता था।

ऐसे में उन्होंने शहीदवॉल पर सामूहिक ध्वजारोहण की परंपरा रखी। इसके तहत कोई भी व्यक्ति गरीब हो या अमीर पद प्राप्त हो या सामान्य व्यक्ति वह झंडे की रस्सी खींचता है। और ध्वजारोहण करने का सुख प्राप्त कर्ता है। हर वर्ष लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है इस वर्ष ज्यादा संख्या हो गई जिसे देखते हुए अगले बार व्यवस्था में सुधार कर सामूहिक झंडारोहण की सहज व्यवस्था की जाएगी।










