‘गुनाहों का देवता’ से गीता प्रेस की पुस्तकों तक पाठकों में उत्साह, ‘अर्ज़ है’ की ओपन माइक में सजी शायरी और कविता की महफ़िल।

‘गुनाहों का देवता’ से गीता प्रेस की पुस्तकों तक पाठकों में उत्साह, ‘अर्ज़ है’ की ओपन माइक में सजी शायरी और कविता की महफ़िल।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। ‘गुनाहों का देवता’ से गीता प्रेस की पुस्तकों तक पाठकों में उत्साह, ‘अर्ज़ है’ की ओपन माइक में सजी शायरी और कविता की महफ़िल। पुस्तक मेला कार्निवाल 2026 के तीसरे दिन साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मेले में सुबह से ही बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के पुस्तक प्रेमियों की आवाजाही बनी रही। पाठकों ने अपनी रुचि के अनुसार साहित्यिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, प्रेरणादायक और मनोरंजक पुस्तकों की खरीदारी की। वहीं, ‘अर्ज़ है’ संस्था की ओर से आयोजित ओपन माइक कार्यक्रम में कवियों, शायरों, रचनाकारों और गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया।

लोकप्रिय साहित्य से धार्मिक पुस्तकों तक पाठकों की पसंद

पुस्तक मेले में धर्मवीर भारती की कालजयी कृति ‘गुनाहों का देवता’ पाठकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। इसके साथ ही सस्ता साहित्य मंडल की ‘गांधी डायरी 2027’, दिव्य प्रकाश दुबे की ‘यार पापा’ और ‘Almost प्यार’, कांता भारती की ‘रेत की मछली’ तथा राही मासूम रज़ा की चर्चित कृति ‘आधा गाँव’ को भी पाठकों ने पसंद किया।

इन पुस्तकों के प्रति पाठकों की रुचि ने एक बार फिर साहित्यिक कृतियों की लोकप्रियता को रेखांकित किया। युवा पाठकों में समकालीन लेखन और प्रेम पर आधारित साहित्य को लेकर उत्सुकता दिखाई दी, वहीं गंभीर साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों ने हिंदी के प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकों को तलाशा।

दूसरी ओर, गीता प्रेस, गोरखपुर की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकों की भी अच्छी मांग रही। धार्मिक साहित्य, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से संबंधित पुस्तकों में पाठकों ने विशेष रुचि दिखाई। रूपा पब्लिकेशन्स की रस्किन बॉन्ड सीरीज ने बच्चों और युवाओं का ध्यान आकर्षित किया, जबकि मंजुल पब्लिशिंग हाउस की हैरी पॉटर हिंदी सीरीज युवा पाठकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही। मेले में विभिन्न विधाओं और भाषाओं की पुस्तकों की उपलब्धता ने पाठकों को अपनी पसंद के अनुसार पुस्तकें चुनने का अवसर प्रदान किया।

लेखक पंकज बरनवाल ने ‘मेरे बाद भी’ पर पाठकों से किया संवाद

पुस्तक मेला कार्निवाल में बिहार के गया से आए लेखक, चिंतक एवं सामाजिक कार्यकर्ता पंकज बरनवाल विशेष आकर्षण रहे। विधि और प्रबंधन में शिक्षित पंकज बरनवाल ने अपनी पुस्तक ‘मेरे बाद भी’ के हिंदी एवं अंग्रेजी संस्करणों के माध्यम से पाठकों से संवाद किया। उनके लेखन में प्रेम, मानवीय रिश्तों, संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को प्रमुखता से स्थान मिलता है।

संवाद के दौरान उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु, उसके भावनात्मक पक्ष तथा हिंदी और अंग्रेजी में विचारों की अभिव्यक्ति से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। साहित्य किस प्रकार मानवीय संबंधों, भावनाओं और जीवन की जटिलताओं को समझने में सहायक होता है, इस विषय पर भी विचार साझा किए गए।

इस संवाद ने पाठकों को लेखक के दृष्टिकोण, उनकी रचनात्मक सोच और लेखन यात्रा को करीब से जानने का अवसर दिया। ‘मेरे बाद भी’ के दोनों संस्करणों की उपस्थिति ने अलग-अलग भाषाओं में साहित्य पढ़ने वाले पाठकों के लिए भी संवाद की संभावनाएं खोलीं।

‘अर्ज़ है’ की ओपन माइक में उभरीं नई प्रतिभाएँ

पुस्तक मेले के तीसरे दिन साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए ‘अर्ज़ है’ संस्था की ओर से विशेष ओपन माइक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवोदित कवियों, शायरों और रचनाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना तथा युवाओं में साहित्य, कविता और कला के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम में सर्वेश सिंह, कुलजीत, देवांश कृष्णा, रत्नेश कुमार वर्मा, देवेश त्रिपाठी, हर्ष प्रताप, अल्ताफ, प्रगति, विष्णुलाल श्रीवास्तव, डॉ. सविनय श्रीवास्तव, श्रिया कुशवाहा, पल्लवी कुमारी और विवेक सिंह ने कविता एवं काव्य पाठ के माध्यम से अपनी भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त किया। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों में साहित्यिक संवेदना, व्यक्तिगत अनुभवों और रचनात्मक कल्पनाओं की झलक देखने को मिली।

वहीं, अभिनव और एकांश ने गायन के माध्यम से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। कविता, शायरी और संगीत की विविध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बनाया तथा उपस्थित साहित्य एवं कला प्रेमियों को एक साथ जुड़ने का अवसर दिया।

कार्यक्रम का संचालन संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय उद्घोषक प्रियांशु श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने अपनी मंच संचालन शैली से कार्यक्रम को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। समापन पर ‘अर्ज़ है’ संस्था की ओर से सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। ओपन माइक की यह पहल उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और साहित्यिक गतिविधियों को व्यापक मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

निःशुल्क बाइबल वितरण भी आकर्षण का हिस्सा

पुस्तक मेला कार्निवाल में साहित्यिक और धार्मिक पुस्तकों के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता भी देखने को मिल रही है। मेले में गिडियन्स इंटरनेशनल इन इंडिया संस्था की ओर से निःशुल्क बाइबल का वितरण किया जा रहा है। विभिन्न विषयों और परंपराओं से जुड़ी पुस्तकों की उपस्थिति मेले को विविधतापूर्ण स्वरूप प्रदान कर रही है।

18 अक्टूबर तक चलेगा पुस्तक मेला कार्निवाल

पुस्तक मेला कार्निवाल 2026 का आयोजन 9 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक लक्ष्मी नारायण वाटिका, लाउदर रोड, प्रयागराज में किया जा रहा है। मेले में प्रवेश निःशुल्क है। पुस्तक प्रेमियों, विद्यार्थियों, परिवारों और साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों से मेले में पहुंचकर पुस्तकों एवं विविध साहित्यिक गतिविधियों का आनंद लेने की अपील की गई है।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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