परछाइयों से निकली समझ की रोशनी, बेटियों ने कहा- ‘हम बोझ नहीं, भविष्य हैं’।

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तीन दिवसीय बाल रंग उत्सव का हुआ समापन

प्रयागराज। परछाइयों से निकली समझ की रोशनी, बेटियों ने कहा- ‘हम बोझ नहीं, भविष्य हैं’। “भूत नहीं, समझ की जरूरत है… डर नहीं, इलाज की जरूरत है…” जैसे संवादों ने गुरुवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र का प्रेक्षागृह गूंजा दिया। मौका था ‘शिक्षा में रंगमंच’ के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय ‘बाल रंग उत्सव’ के समापन का। अंतिम दिन बाल कलाकारों ने दो अलग-अलग विषयों पर आधारित नाटकों के जरिए दर्शकों को मानसिक स्वास्थ्य, अंधविश्वास, बेटी बचाओ, नारी शिक्षा और नशामुक्ति जैसे गंभीर मुद्दों से रूबरू कराया।

समापन अवसर पर सुनील चौहान के निर्देशन में ‘नया मकान’ और अश्विनी के निर्देशन में ‘मैं बोझ नहीं, भविष्य हूं’ का मंचन हुआ। दोनों प्रस्तुतियों में बच्चों के अभिनय, संवाद अदायगी और मंचीय आत्मविश्वास ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।

‘नया मकान’ की कहानी एक ऐसे परिवार की है, जो नए घर में आने के बाद रहस्यमयी घटनाओं का सामना करता है। परिवार की बेटी अन्वी को परछाइयां दिखाई देती हैं और अनजानी आवाजें सुनाई देती हैं। उसकी परेशानी को समझने के बजाय परिवार इसे पहले डर और भ्रम मानता है। इसके बाद अंधविश्वास के चलते तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक का सहारा लिया जाता है।

हालात बिगड़ने पर अन्वी को अस्पताल ले जाया जाता है। चिकित्सक बताते हैं कि समस्या भूत-प्रेत की नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारी की है। इसके बाद नाटक दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय संवेदनशीलता और चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है।

दूसरी प्रस्तुति ‘मैं बोझ नहीं, भविष्य हूं’ ने बुंदेलखंड की विलुप्तप्राय लोकनाट्य परंपरा स्वांग शैली के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया। नाटक में बेटी बचाओ, नारी शिक्षा और नशामुक्ति जैसे मुद्दों को कहानी, गीत, संगीत, हास्य-व्यंग्य और प्रभावशाली संवादों के जरिए सामने रखा गया।

कहानी ऐसे ग्रामीण समाज की है, जहां बेटियों को बोझ समझा जाता है और नशाखोरी परिवार की खुशियों को प्रभावित करती है। इसी माहौल में एक बेटी अपने परिवार और समाज को यह समझाने की कोशिश करती है कि बेटियां बोझ नहीं, परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं।

मंच पर सूर्यांश ने नट, चित्रलेखा ने नटी, ऋषि ने हल्के, देव ने बड्डे और अनुज ने शेखचिल्ली, अदीफा सिद्दीकी, मोक्षी जैन, काव्या जैन, ग्रीवा सिंह, अनुभूति सिंह, अर्जुन गुप्ता, रिद्धि वर्धन उपाध्याय, नायरा सक्सेना, अन्वी गंगल, अंशिका शर्मा, सैय्यद हमजा, फाज रहमान और लक्ष्य शर्मा ने शानदार अभिनय किया। प्रकाश व्यवस्था सक्षम मिश्रा ने संभाली।

कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि प्रो. आदेश कुमार श्रीवास्तव, डीन, विधि संकाय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज, केन्द्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय और वरिष्ठ रंगकर्मी अवतार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

समापन अवसर पर केन्द्र निदेशक सुदेश शर्मा ने दोनों नाट्य निर्देशकों को अंगवस्त्र, पौधा और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। बाल कलाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। नाट्य प्रस्तुतियों में उत्कृष्ट अभिनय करने वाले कलाकारों को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में वरिष्ठ रंगकर्मी सुषमा शर्मा एवं अशोक शुक्ला उपस्थित रहे। संचालन आकाश अग्रवाल ने किया।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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