पशु-पक्षी सब बेहाल, बूंद-बूंद पानी के लिए बेजुबान तरस रहे।

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

ब्यूरो चीफ एस.के. सिंह की रिपोर्ट

बेरुआरबारी,बलिया। प्रचंड गर्मी के बीच अब अप्रैल माह अपने अंतिम पड़ाव पर हैं। एक सप्ताह से धरती का पारा लगातार चढ़ता जा रहा हैं। तेज पछुआ हवा के साथ लू चलने से जन जीवन तो अस्त-व्यस्त हो गया हैं।

वही ताल तलैया, जलाशय व पोखरे पूरी सूख गए हैं। जिससे पशु-पक्षी सब बेहाल हैं। बूंद-बूंद पानी के लिए बेजुबान तरस रहे हैं तो जंगली जानवरों के समक्ष पानी का गंभीर संकट उत्पन्न होने लगा है। गर्मी के दस्तक के साथ ही अधिकांश तालाब के साथ साथ इस बार विशाल सुरहताल का अधिकांश हिस्सा सुख गया हैं।

सुरहताल के अंदर नावे पानी के आभाव में जैसे तैसे गड़ारी नाले में पड़ी हैं। अप्रैल बीतते-बीतते बड़े तालाब व जलाशय भी सूख गए। सबसे अधिक दिक्कत पशुपालकों को हो रही है। उनके सामने जानवरों को नहलाने का संकट उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि गांवों में प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च कर पोखरों और तालाबों की खोदाई की जाती है। इसका एक मात्र उद्देश्य जल संरक्षण है। लेकिन समय से पूर्व ही जवाब दे गए तालाब व पोखरे खोदाई की पोल खोल रहे हैं।

बेरुआरबारी विकास खंड के सहित अन्य गांवों के तालाबों और पोखरों की मनरेगा के तहत खोदाई कराई गई थी। अधिकांश जगहों पर देखरेख के अभाव में इनकी सूरत फिर बदरंग हो गई है। अधिकांश तालाब सूख चुके हैं। जिन तालाबों में इन दिनों भरपूर पानी होना चाहिए था, वह तालाब सूख चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को सूखे पोखरों में पानी भरवाने के लिए पहल करनी चाहिए। अगर शीघ्र पहल नहीं हुई तो पशु-पक्षियों के जीवन पर संकट खड़ा हो जाएगा।

AT Samachar
Author: AT Samachar

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai