नाम पर्यावरण अभियंता काम सिविल का
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। नगर निगम प्रयागराज जिस विभाग को शहर को हरा भरा करने की जिम्मेदारी दी गई है वह यह काम ना कर सभी अन्य काम कर रहा है शहर की हालत क्या है यह किसी से छिपा नहीं है नगर निगम के पार्कों की दशा क्या है। यह बताने की जरूरत नहीं है पर्यावरण अभियंता इन पार्कों को कभी देखने जाते हैं यह भी कह पाना मुश्किल है कारण साफ है कि पर्यावरण के साथ ही इन्हें नियम विरुद्ध सिविल का कार्य दे दिया गया है इसके साथ ही एक दर्जन से अधिक अन्य कार्य भी इन्हीं के पास है ऐसा नगर निगम की जिम्मेदारों ने क्यों किया यह तो वही बता सकते हैं।
जानकारी के अनुसार शहर को हरा भरा और पर्यावरण की अनुरूप रखने के लिए नगर निगम में पर्यावरण में अभियंता की नियुक्ति की गई इसका मकसद साफ था कि नगर निगम के पार्क सहित अन्य स्थानों को हरा-भरा कैसे रखा जाए यह पर्यावरण अभियंता को सौपा गया लेकिन यह विभाग तो अपने मूल मकसद से ही भटक गया।
पर्यावरण अभियंता को पदीय दायित्वों के साथ सिविल कार्य के साथ नमामि गंगे, शौचालय सहित एक दर्जन अन्य कार्य भी आवंटित कर दिए गए सवाल यह आता है कि पर्यावरण की डिग्री लेकर आए व्यक्ति कैसे सिविल का काम कर सकता है उसे कैसे पता हो गया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता क्या होगी वह कैसे जर्जर भवनों का मूल्यांकन कर सकेगा ? क्या निगम में सिविल कार्यों करने वालों अभियंताओं की कमी हो गई है या निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने के लिए ऐसे व्यक्ति को बैठा दिया गया जिसे सिविल की एबीसीडी का ज्ञान ही नहीं है।
सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कैसे एक पर्यावरण अभियंता को इतने महत्वपूर्ण विभागों का कार्य दे सकते हैं विभाग के सूत्र बताते हैं कि नगर निगम के इस समय पूरी तरह से उल्टी गंगा बह रही है यदि पर्यावरण अभियंता की कार्यकाल के कार्यों की जांच कराई गई तो बहुत बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा।










