संभागायुक्त ने चौपाल लगाकर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से किया संवाद।

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देवेन्द्र कुमार जैन की रिपोर्ट 

भोपाल, मध्य प्रदेश। संभागायुक्त ने चौपाल लगाकर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से किया संवाद। भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह द्वारा रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के ग्राम गगनवाड़ा में चौपाल लगाकर दुग्ध उत्पादन कार्य से जुड़े स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद किया गया। संभागायुक्त ने महिलाओं से संवाद के दौरान पशुपालन गतिविधियों, पशुधन की उचित देखभाल, पौष्टिक आहार, स्वच्छ वातावरण और बेहतर दूध उत्पादन के लिए शासकीय योजनाओं तथा तकनीकों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि शासन डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर उनकी आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने निरंतर प्रयास कर रहा है।

संभागायुक्त ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन अपनाने से आमदानी में वृद्धि होगी। दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए काम करें। शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। साथ ही आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने के लिए सहायता भी प्रदान की जाती है। शासन द्वारा संचालित इन योजनाओं का महिलाएं लाभ लें। उन्होंने सब्जी उत्पादन के बारे में भी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से चर्चा की।

कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा ने महिलाओं से संवाद करते हुए कहा कि खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करें। इससे अतिरिक्त आमदानी होगी और आर्थिक समृद्धि बढेगी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को पशुपालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों को ध्यान में रखकर सिलवानी के साथ ही सभी विकासखण्डों में दुग्ध समृद्धि अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने संभागायुक्त को जिले में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु किए जा रहे कार्यो से भी अवगत कराया। डेयरी एवं पशुपालन विभाग के उप संचालक द्वारा जिले में दुग्ध समृद्धि अभियान के तहत की जा रही गतिविधियों तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी गईं संभागायुक्त से संवाद के दौरान जानकारी दी गई कि गगनवाडा ग्राम पंचायत में सात स्व-सहायता समूह गठित हैं जिनमें कुल 80 परिवार सम्मिलित हैं। इन समूहों की महिलाओं को 23 लाख रू बैंक लिंकेज से उपलब्ध कराए गए हैं। समूह की 23 महिलाएं लखपति दीदी हैं। इन समूहों की महिलाओं द्वारा पशुपालन, खेती, आटा चक्की एवं किराना दुकान संचालन सहित अन्य आजीविका गतिविधियां की जा रही हैं।

 

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