भारत रंग महोत्सव के दूसरे दिन कलाकारों ने जीता ‘दर्शकों का दिल
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। कला से अनुभूति तक: ‘विंसेंट-एर मृत्यु’ ने मंच पर रचा संवेदनाओं का कैनवास। नेशनल स्कूल ऑफ ड्राम एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत रंग महोत्सव के दूसरे दिन प्रेक्षागृह गुरुवार की संध्या मात्र एक रंगमंच नहीं रहा, बल्कि वह एक ऐसा ‘फ्रेम’ बन गया जहाँ कलाकार और दर्शक के बीच मानवीय संवेदनाओं का इतिहास रचा गया। भारत रंग महोत्सव (BRM) के अंतर्गत कासबा अर्घ्य, कोलकाता की नाट्य प्रस्तुति ‘विंसेंट-एर मृत्यु ‘ ने न केवल आँखों को नम किया, बल्कि मंच पर ‘कंपोजिशन’ और ‘इमोशन्स’ का एक ऐसा कोलाज प्रस्तुत किया, जो दुर्लभ है। प्रकाश की लकीरों में ढलती संवेदना को जब दर्शक मंच को देखता है, तो वह केवल पात्रों को नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे मौन को भी कैद करना चाहता है। कोलकाता की नाट्य संस्था कासबा अर्घ्य द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘विंसेंट-एर मृत्यु’ ने विश्वप्रसिद्ध डच चित्रकार विंसेंट वान गॉग के जीवन को रंगमंचीय भाषा में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से साकार किया। मनीष मित्रा द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस प्रस्तुति ने वान गॉग के छोटे किंतु तीव्र और संघर्षशील जीवन की संवेदनात्मक यात्रा को एक जीवंत उत्सव के रूप में मंच पर उतारा, जिसकी परिणति वर्ष 1890 में उनकी मृत्यु के साथ होती है।
नाटक की संरचना में वान गॉग की प्रसिद्ध पेंटिंग्स के प्रोजेक्शन, भाव-प्रधान संगीत और गैर-रेखीय कथन शैली का सशक्त संयोजन देखने को मिला। अतियथार्थवादी दृश्य संरचनाएँ, शारीरिक अभिनय और प्रकाश की सूक्ष्म रेखाओं ने कलाकार की आंतरिक मानसिक दुनिया को मूर्त रूप दिया। प्रस्तुति ने दर्शकों को एक इमर्सिव अनुभव प्रदान करते हुए यह अनुभव कराया कि कला केवल दृश्य नहीं, बल्कि अनुभूति का विस्तार है।
संगीत-प्रधान इस प्रस्तुति में राजू बेड़ा एवं कौष्टव गुप्ता ने वान गॉग की भूमिका में प्रभावशाली अभिनय किया। सूत्रधार अरिजीत चक्रवर्ती, चित्रकार शुभजीत चक्रवर्ती, सीमा घोष, मैरी आचार्य, मयूराक्षी सेन तथा सुभाषिस दास के साथ ही कलाकार गौरब मुखर्जी, बिनायक पाल, सौम्या हाज़रा, प्रीशीत रॉय, राहुल डे, दीपांकर सरकार एवं पौलामी सेनगुप्ता ने भी अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
प्रस्तुति के संगीत पक्ष ने नाटक की संवेदनात्मक प्रभावशीलता को और गहराई दी। संगीत दल में गायक शिवप्रसाद भौमिक, कीबोर्ड पर अरिजीत मुखर्जी, गिटार पर देवप्रसाद रॉय तथा ड्रम एवं परकशन पर सैमुअल आर्को सिंह की जीवंत संगति ने मंचीय वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अजय कुमार मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज कमिश्नरेट, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कलाप्रेमी, गणमान्य तथा एनएसडी के प्रतिनिधि प्रशासन उपस्थित रहे।










