त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। गंगा की रेती पर छवा द बंगला पर झूमे श्रोता, अवधी लोकनृत्य ने बांधा समां। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “चलो मन गंगा–यमुना तीर” कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत गुरुवार की सांस्कृतिक संध्या लोक रंग, संगीत और नृत्य की सुरमयी छटा से सराबोर रही। कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने संगम की रेती पर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अयोध्या से आईं संगीता आहूजा एवं उनके साथी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत अवधी लोकनृत्य से हुआ, जिसने अपनी जीवंत भंगिमाओं और लोक-संवेदना से वातावरण को उल्लासमय बना दिया। इसके पश्चात शाम्भवी शुक्ला ने अपने सुमधुर गायन से समां बांध दिया। उन्होंने “चलो मन गंगा यमुना तीर”, “गंगा की रेती पर छवा द बंगला”, “रंग डारूंगी मैं”, “जनि जा बरसाने होरी”, “सजा दो घर को गुलशन सा” तथा “दमादम मस्त कलंदर” जैसी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
वाराणसी से आए अमृत मिश्रा एवं वंसुधरा ने कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर अपनी लयकारी और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके बाद मीरजापुर से पधारे शिवलाल गुप्ता ने लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति देते हुए “जय होवे जयकार हो”, “मैया मोरी जय जगदेव”, “हमरे मीरजापुर में मस्ती के चाल बा”, “महिमा न जानो गंगा महरानी” एवं “फागुन मस्त महीना हो बलम” जैसे गीतों से वातावरण को भक्तिमय और लोक-रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम का संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं लोकगायक उदय चंद्र परदेशी ने सभी कलाकारों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया।










