कुश श्रीवास्तव लगभग हर वोटरों के पास पहुंचने की की है कोशिश
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। कुश श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर बनाई पहचान, स्नातक मतदाताओं के बीच है कुश की गहरी पैठ। कहते हैं कि मन में लगन हो और सच्ची निष्ठा तो मेहनत के बल पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कुछ ऐसे ही एक होनहार युवा नेता जिनके पिता सीनियर एडवोकेट वीपी श्रीवास्तव हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे उनकी अपनी एक अलग पहचान है तो उनका बेटा भी उनसे अब एक कदम आगे बढ़ गया। उनका बेटा लगातार जहां उनके वकालत पेशे में मदद कर रहा है अब उसकी एक और पहचान युवा नेता के रूप में हुई है। वह लगातार स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पैठ जम रहा है। प्रयागराज से लेकर महोबा तक उसके चाहने वाले मतदाता है, अब हर कोई उसकी ही और देख रहा है कि उसकी पार्टी के लोग एक आदद टिकट देकर उन्हें मैदान में कब लाते हैं।
हम बात कर रहे हैं प्रयागराज के एक युवा जिसका नाम कुश श्रीवास्तव है। कुश श्रीवास्तव के पिता सीनियर अधिवक्ता भूतपूर्व अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन वीपी श्रीवास्तव रहे और उनका नाम हाईकोर्ट बार के हर सदस्य के जुबा पर रहता है। दूसरी ओर कुश श्रीवास्तव भी पिता के वकालत पेशे में मदद कर रहे हैं तो अपनी एक नई पहचान बनाने के लिए स्नातक निर्वाचन सीट यानी इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी पहचान बनाने के लिए वह एक तरह से मैदान में है मतदाताओं से मिल रहे हैं और जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है उनका नाम जुड़वाने का काम भी उन्होंने बखूबी किया है उनकी अपनी एक आईटी सेल है जो स्नातक मतदाताओं को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जोड़ने का काम कर रही है।

लगातार कुश श्रीवास्तव मतदाताओं के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनकर उसका निस्तारण कैसे होगा इस पर लगातार मंथन कर रहे हैं। कुश श्रीवास्तव का कहना है कि शिक्षकों से ज्यादा अधिवक्ता स्नातक हैं जहां पूरे क्षेत्र में 30 से 35000 शिक्षक मतदाता होंगे वहीं अधिवक्ताओं की संख्या उनसे कहीं दो गुना से भी अधिक है। अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार की बात की जाए तो यहां लगभग 20000 से अधिक स्नातक होंगे। कुश की तरह ही उनके जानने वाले लोग भी कुश को हाथों हाथ ले रहे हैं उनका कहना है कि कुश जैसे लोग ही इस निर्वाचन खंड का कायाकल्प कर सकते हैं, लोगों की शोच बदल सकते हैं और जो भी स्नातक मतदाताओं की समस्याएं हैं उन्हें आसानी से उसे पटल पर रख सकते हैं, जहां पर उन्हें रखने की आवश्यकता होती है।
लेकिन देखा यह जाता है कि स्नातक निर्वाचन खंड से जीत कर जाने वाले लोग स्नातक मतदाताओं की एक भी समस्या उस मंच पर नहीं उठाते जहां उन्हें उठाना चाहिए यही कारण है कि स्नातक मतदाता हमेशा अपने को ठगा महसूस करता है। खैर कुश श्रीवास्तव अपने मिशन की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं अब देखना यह होगा कि उनकी पार्टी के लोग उन्हें टिकट से कब नवाजते हैं।










