त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। भगवान बनाने के लिए माँ ने झेला ‘कलंक’ मंच पर जब छलका कैकेयी का दर्द। हम सबने सुना है कि कैकेयी ने जिद करके राम को वनवास भेजा, लेकिन क्या कभी सोचा है कि अगर राम वन न जाते तो क्या वो कभी ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बन पाते? रविवार की शाम मंच पर जब “कैकेयी का राम” नाटक शुरू हुआ, तो सदियों से चली आ रही धारणाएं ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।
मुकेश शर्मा के निर्देशन में सजे इस नाटक ने चीख-चीख कर कहा कि राम को वनवास भेजना कैकेयी की साजिश नहीं, बल्कि रावण के अंत और मानवता को बचाने की एक सोची-समझी योजना थी।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित बैसाखी महोत्सव के अंतर्गत रविवार को केंद्र प्रेक्षागृह में प्रस्तुत नाटक “कैकेयी का राम” ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
राजमहलों की सुख-सुविधा नहीं, संघर्ष से बनते हैं ‘राम’
मुकेश शर्मा द्वारा लिखित और निर्देशित इस नाटक ने महारानी कैकेयी के दृष्टिकोण से रामायण की एक अनूठी पुनर्कथा पेश की। नाटक में दिखाया गया कि कैकेयी का उद्देश्य केवल भरत को राजा बनाना नहीं था, बल्कि अयोध्या के आसपास के उन क्षेत्रों को राक्षसों के आतंक से मुक्त कराना था, जहाँ ऋषि-मुनि और आम जनता भय के साये में जी रही थी। नाटक का सबसे सशक्त पक्ष वह संवाद था जिसमें कैकेयी कहती हैं कि “सिंहासन पर बैठा राजा कभी वह परिवर्तन नहीं ला सकता, जो लोगों के बीच रहने वाला एक तपस्वी ला सकता है।”
भावुक हुए दर्शक, जीवंत हो उठा मंच
नाटक के भावपूर्ण संवादों और प्रभावशाली संगीत ने प्रेक्षागृह को अंत तक बांधे रखा। मंच सज्जा और तकनीकी संयोजन इतने सटीक थे कि हर दृश्य दर्शकों के मन में गहराई तक उतरता चला गया। जब राम को वन भेजने के पीछे के महान उद्देश्य और कैकेयी के भीतर के ‘त्याग’ को मंच पर दर्शाया गया, तो दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. पंकज माला शर्मा (संगीत विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़), सदविंदर पाल सिंह (मैनेजिंग ट्रस्टी, गुरु गोविंद सिंह मेमोरियल ट्रस्ट, प्रयागराज), विशिष्ट अतिथि धर्मेन्द्र प्रधान (व्यवस्थापक, पत्थरचट्टी रामलीला कमेटी, प्रयागराज), मोहन टंडन (व्यवस्थापक, पजावा रामलीला कमेटी, प्रयागराज), सुखमिंदर कौर ब्रार (अध्यक्ष, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी) एवं केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन हिमानी रावत ने किया।










