देवेन्द्र कुमार जैन की रिपोर्ट
सीधी, एमपी। ऋषिकेश फाउंडेशन की बाल टोली ‘मोगली पलटन’ ने इस रक्षा बंधन को एक खास अंदाज़ में मनाया। बाल टोली ने स्थानीय और देशज प्रजाति के पेड़ों को राखी बांधकर ‘सुरक्षा बंधन’ का आयोजन किया। यह पहल पेड़ों को बचाने और उनके महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से की गई।

मोगली पलटन के सदस्यों ने पीपल, बरगद, नीम, महुआ, हर्रा, बहेरा, सेधा और आम जैसे वृक्षों को राखी बांधी। इस दौरान बच्चों ने बताया कि ये पेड़ सिर्फ़ पेड़ नहीं, बल्कि एक पूरा पारितंत्र हैं, जो कई तरह के जीवों और वनस्पतियों को जीवन देते हैं।
इस अवसर पर कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सागौन का ख़तरा
सीधी ज़िले में सागौन के पेड़ लगाए जाने से स्थानीय पारितंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे गायों के लिए चारा भी नहीं बचा है।
किसानों की मुश्किलें
जंगलों में चारे की कमी के कारण आवारा पशुओं की संख्या बढ़ गई है, जिससे किसानों को भारी नुक़सान हो रहा है। वे अपनी पारंपरिक खेती छोड़ रहे हैं और ऐसी फ़सलें उगाने को मजबूर हैं जिनमें ज़्यादा पानी और रसायनों की ज़रूरत पड़ती है।
खनन और बंदरों का पलायन
खनन के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। जंगलों में फलदार वृक्षों के ख़त्म होने से बंदरों को मजबूरन बस्तियों, खेतों और बागों की तरफ़ आना पड़ रहा है।

ऋषिकेश फ़ाउंडेशन की इस पहल का मकसद लोगों को इन गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं के बारे में बताना और पेड़ों को बचाने के लिए प्रेरित करना है।










