राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच प्रयागराज चैप्टर द्वारा प्रथम विश्व युद्ध हाईफा विजय दिवस (23 सितंबर 1918) की याद में वीर शहीद सेनानियों को नमन व श्रद्धांजलि अर्पित किया।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच प्रयागराज  के तत्वावधान में प्रथम विश्व युद्ध हाईफा (इजराइल) विजय दिवस 23 सितंबर 1918 की याद में पूर्व सैनिकों, विद्धवान भाई बहनों ने लाल बहादुर शास्त्री तपोवन पार्क न्यू कैंट प्रयागराज में  हाईफा विजय दिवस पर वीर शहीद सेनानियों को नमन व श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी गौरव गाथा परिचर्चा कार्यक्रम हुआ।

मुख्य अतिथि डॉक्टर अनिल सिंह भदौरिया, अध्यक्षता कैप्टन एस एन तिवारी संचालन पूर्व सूबेदार श्याम सुंदर सिंह पटेल, संयोजन डॉ संजय कुमार भारती, आशुतोष मिश्रा, सुश्री प्रतिमा मिश्रा आदि ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व उपस्थित लोगों ने वीर शहीद सेनानियों को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित किया तथा राष्ट्रगान,भारत माता की जय, वंदे मातरम, हाइफा वीर शहीद अमर रहें, वीर शहीदों की कुर्बानी याद करेगा हर हिंदुस्तानी नारों के साथ हुआ तत्पश्चात सभी का स्वागत पूर्व सूबेदार  श्याम सुंदर सिंह पटेल ने किया।

 

विषय प्रवर्तन करते हुए डॉक्टर संजय कुमार भारती ने कहा कि यह बड़े गौरव का विषय है कि प्रथम विश्वयुद्ध इजराइल के हाईफा पर भारतीय सेनाओं ने विजय हासिल कर 23 सितंबर 1918 को विजय दिवस मनाया था आज उनकी याद में  परंपरा कायम रखते हुए सेना के सम्मान, साहस, शौर्य समर्पण तथा बहादुरी व पराक्रम की गौरव गाथा परिचर्चा आयोजित है जिस पर अपने विचार प्रस्तुत कर उन्हें याद किया जाए।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉक्टर अनिल  सिंह भदौरिया ने कहा गर्व  का विषय है कि भारतीय सेनाएं बल्लम, भाला, बरछी, ढाल, तलवार से अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए जर्मन व तुर्की फौज जो स्टेन गन व गोला-बारूद से लैस थी उन्हें परास्त कर हाईफा पर विजय हासिल किया और विजय दिवस 23 सितंबर 1918 को मनाया था हम उन वीर सेनानी शहीदों को शत शत नमन करते हैं व आप सभी को विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं।

इस अवसर पर पूर्व सूबेदार श्याम सुंदर सिंह पटेल ने कहा कि भारतीय सेनाएं हमेशा से बहादुर और मजबूत रही है व उनकी बहादुरी, मनोबल और साहस की प्रशंसा पूरे विश्व में होती है। हाइफा विजय दिवस पर वीर सेनानी शहीदों को याद किया जा रहा है जो गर्व का विषय है इससे हमारी सेनाओं व आम जन  का मनोबल बढ़ाता है जिससे भारत हमेशा अग्रणी रहे इसलिए ऐसे आयोजन  होते रहना चाहिए।

अध्यक्षता कर रहे कैप्टन एस एन तिवारी हाईफा विजय की गौरव  गाथा विस्तार से सुनाई व वीर रस की रचनाएं प्रस्तुत किया जिसमें गोली गोलों की बौछार होती रही,  सर पर बांधे कफन वे डटे ही रहे, याद क्यों न करें हम उनकी, रो रही भारती जिस रतन के लिए….. आगे उन्होंने कहा कि इजराइल संसार के यहूदी धर्मावलंबी प्राचीन शब्द का नाम रूप है यह नया राष्ट्र 14 मई 1948 को अस्तित्व में आया यह फिलिस्तीन का वृहद भाग है 14 वीं शताब्दी में यहां 4000 ओटोमैन का साम्राज्य था यह आटोमेन जर्मन व तुर्क के लोग थे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इजराइल को आजाद कराने के लिए हाइफा का युद्ध हुआ जो इजराइल में हाईफा नामक शहर है उस समय भारत में अंग्रेजी शासन था अंग्रेजी सरकार ने हाईफा युद्ध में भाग लेने की पहल की और भारत से राजस्थान और मैसूर की सेना को युद्ध में भाग लेने का आदेश दिया गया इस युद्ध में भारतीय सेना के राजस्थानी रणबांकुरे भाग लिये और भारतीय सेना के सेनापति मेजर दलपत सिंह जो पाली जिले के राणा राजपूत थे उनकी कमांड में इजराइल जाने का आदेश हुआ इस युद्ध में जोधपुर रियासत के राजपूत और हैदराबाद के सैनिकों ने भाग लिया हैदराबाद के सैनिक मुस्लिम थे इसलिए अंग्रेजी शासन ने उन्हें तुर्कों के साथ युद्ध करने से रोक कर राजस्थानी सेना को आगे बढ़ाया सेनापति मेजर दलपत सिंह शेखावत, अमन सिंह ने आदेश मिलते ही घोड़ों, तलवारों और भालों से लैस सेना को आगे बढ़ाया पर इसी बीच अंग्रेजी शासन ने देखा कि ऑटोमैन सेना तोपों और बंदूकों से लैस थी तब राजस्थानी सेना को युद्ध से रोका गया पर मेजर दलपत सिंह का जवाब था कि साहब राजस्थानियों में कदम बढ़ाने के बाद वापस लौटने का रिवाज नहीं है जान चली जाए, सर कट जाए, पर वापस नहीं जाते, जीत या वीरगति को प्राप्त होना ही है यह युद्ध शुरू हो गया इजराइल के हाइफा शहर में राजस्थानी रणबांकुरे कूद पड़े और बंदूक तोपों के सामने अपनी छाती तान दी देखते ही देखते बंदूक और तोपें फीकी पड़ने लगी और 23 सितंबर 1918 में हाईफा शहर और इजराइल को भारतीय सेना ने आजाद करा लिया इस युद्ध में जोधपुर रियासत के 900 सैनिक शहीद हुए, जर्मन और तुर्क सेना पर हमारा कब्जा हुआ, उनके 1350 सैनिक हमारी सेना ने कैदी बनाएं 53 ऑटोमेन अधिकारी 17 तोपखाना व मशीन गन को हमने अपने कब्जे में ले लिया इस युद्ध में 900 सैनिकों के साथ 60 घोड़े भी शहीद हुए हमारे सेनापति मेजर दलपत सिंह ने युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए और 400 सालों से कब्जा किए ऑटोमेंन साम्राज्य का अंत हुआ बस यही दुख हुआ कि मेजर दलपत सिंह, मेजर शेर सिंह, सवार भगत सिंह, सवार शहजाद सिंह, दफादार धोकल सिंह, गोपाल सिंह जैसे महान योद्धाओ को युद्ध में वीरगति प्राप्त हुई और हाईफा युद्ध में जीत के बाद ब्रिटिश सेना कमांडर इन चीफ हाउस के नाम से एक भवन बनवाया और चौराहे पर 3 राजस्थानी सैनिकों की प्रतिमा लगवाई जोधपुर रियासत को यह बहुत बड़ी कामयाबी और सम्मान मिला मेजर दलपत सिंह शेखावत को मिलिट्री क्रास, कैप्टन अमन सिंह को सरकार बहादुर की उपाधि से सम्मानित कर इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट और ऑर्डर आफ ब्रिटिश एंपायर से सम्मानित किया गया आज भी येरूशलम और  रामलेह में हमारे 900 सैनिकों की समाधि बनी हुई है इजराइल के महापौर हर वर्ष 23 सितंबर को भारतीय दूतावास के लोगों के साथ हाईफा दिवस मनाते हैं तब से भारत और इजरायल के बीच अच्छे संबंध बने हुए हैं आज भी हमारी शांति सेनाएं इजराइल में जाती है जो इस देश के लिए गौरव का विषय है।

प्रतिमा मिश्रा ने वीर शहीदों की शौर्य गाथा में कहा- केवल तोप और बंदूकों से युद्ध नहीं लड़े जाते, हिम्मत, साहस, हिकमत से युद्ध सदा जीते जाते हैं…….., नायब सूबेदार  विनोद सिंह ने कहा, जीवन है संग्राम इसे लड़ना ही पड़ेगा, जो लड़ नहीं सकेगा, आगे बढ़ नहीं सकेगा…….., इसी क्रम में प्रमोद कुमार सिंह ने कहा ये शहीदों की जय हिंद बोली, ऐसी वैसी यह बोली नहीं……., कार्यक्रम में  आशुतोष मिश्रा ने वक्ताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज हमने बहादुर   सैनिकों के इतिहास को जाना जो काबिले तारीफ है ऐसे आयोजन में  सबको शामिल होकर सेना के बहादुरी भरे कार्यों व राष्ट्रीयता की चर्चा करनी चाहिए जिससे लोगों का मनोबल बढ़े इस आयोजन का यही तात्पर्य है इसी तरह उक्त से मिली जुली बातें अन्य वक्ताओं ने भी कही।

कार्यक्रम में सामिल प्रमुख लोगों में श्याम सुंदर सिंह पटेल, डॉक्टर संजय कुमार भारती, डॉक्टर अनिल सिंह भदौरिया, कैप्टन यस एन तिवारी, प्रतिमा मिश्रा, आशुतोष मिश्रा, रवि कांत शुक्ला, प्रमोद कुमार सिंह, मंसूर हसन, विनोद कुमार सिंह, दीक्षा, कौशल्या सिंह, के पी सिंह, एस के पांडे, जितेंद्र पांडे, रंजीत सिंह आदि कई लोग शामिल रहे अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन डॉ संजय भारती ने किया।

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Author: AT Samachar

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