भगवान श्रीराम जी के जन्म दिन एवं रामनवमी उत्सव के शुभ अवसर पर “पर्यावरण भारती ” द्वारा देव वृक्ष पीपल, बरगद और गूलर के 3 पौधे लगाए गए।

भगवान श्रीराम जी के जन्म दिन एवं रामनवमी उत्सव के शुभ अवसर पर "पर्यावरण भारती " द्वारा देव वृक्ष पीपल, बरगद और गूलर के 3 पौधे लगाए गए।

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वृन्दावन, कियूल, लखीसराय, बिहार। भगवान श्रीराम जी के जन्म दिन एवं रामनवमी उत्सव के शुभ अवसर पर “पर्यावरण भारती ” द्वारा देव वृक्ष पीपल, बरगद और गूलर के 3 पौधे लगाए गए। पौधारोपण का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी हिमालय ने किया। पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से संसार के मानव को बचने के लिए वृक्षारोपण अभियान चलाना होगा। देव मानव ( देवता), महामानव (महापुरुष) तथा सामान्य मानव के जन्म दिन पर पौधारोपण करना प्रत्येक मानव का परम कर्तव्य है।
भगवान श्रीराम जी का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को ” अयोध्या ” में हुआ था। भारतीय पंचांग के अनुसार 26 मार्च 2026 को दिन में 11•48 बजे से चैत्र शुक्ल नवमी का शुभारंभ है। 27 मार्च 2026 को सुबह 10•06 ही चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी है।

भारत के पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी को मध्याह्न दोपहर में हुआ था। अतः पूजा का मुख्य समय 26 मार्च को है। परन्तु भारत में सूर्योदय का विशेष महत्त्व है। इसलिए अयोध्या में श्री रामनवमी उत्सव 27 मार्च को मनाया जायेगा। भगवान श्रीराम जी का जीवन दुनियाभर के मानव के लिए अनुकरणीय है। वे माता-पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे। भातृत्व प्रेम अनूठा था। वे सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। माता सबरी के बेर खाये। केवट राज को गले लगाये। छोटे प्राणी गिलहरी को भी स्नेह दिये। गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार किये। लंका पर विजय के बाद बिभीषण को राजा बनाये। भगवान श्रीराम जी ने छोटे भाई लक्ष्मण से कहा—” जननी– जन्मभूमि स्वर्ग से महान है”।अतएव भारत में प्राचीन काल से ही भगवान श्रीराम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है।

श्री राम नवमी दिन विधि विधान से पूजा करने से मानव जीवन में सुख और शान्ति का आगमन होता है। अपने घरों के मंदिरों में भगवान श्रीराम जी का चित्र या प्रतिमा स्थापित किया जाता है। गंगाजल से अभिषेक करने के बाद घी के दीपक जलायें। तत्पश्चात धूप दीप जलाकर वातावरण को पवित्र करें। भगवान को फल,फूल,तुलसी दल,पंचामृत अर्पित कर रामायण या रामचरितमानस तथा श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ श्रद्धापूर्वक किया जाता है। अंत में भगवान की आरती की जाती है। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है।

भगवान श्रीराम जी को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। अतः भगवान श्रीराम जी का जन्म दिन (राम नवमी) केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म,सत्य तथा मर्यादा का प्रतीक है। उन्होंने आदर्श जीवन जीकर संसार के मानव को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किये। चैत्र शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को जगतजननी माँ दुर्गा जी का अंतिम पूजा भी है। इसलिए श्री राम नवमी उत्सव के शुभ अवसर पर देव वृक्ष का पौधारोपण पुनीत कार्य है।

पर्यावरण भारती के पौधारोपण कार्यक्रम में रणधीर प्रसाद, विजय कुमार, हिमालय, अमरेंद्र महतों, राम बिलास शाण्डिल्य, शिक्षक अरविंद कुमार,मनोज कुमार सिंह, नीरज नयन, रघुवंश प्रसाद, पीयूष, आशीष, मनीष, आयूष इत्यादि ने भाग लिए।

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Author: AT Samachar

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