धर्मेंद्र प्रजापति की रिपोर्ट
चंदौली। चहनियां नागपंचमी के अवसर पर क्षेत्र के महुआरी व बिसुपुर गांव में सर फोड़ने की एक ऐसी परम्परा होती है जिसको सुनते ही रौंगटे खड़े हो जाते है। इस परम्परा का निर्वहन करने के लिए बकायदे दोनो गांव बिसुपर – महुआरीखा स में तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है । इस परंपरा को देखने के लिए ग्रामीणों के हुजूम के साथ पुलिस फोर्स भी मौजूद रही । इस बार चुस्त दुरुस्त व्यवस्था से पत्थर बाजी नही हुई।
बिसुपुर और महुआरीखास के बीच एक ऐसी परम्परा नाग पंचमी पर होता है। जिसे सुनने के बाद लोगो के रौंगटे खड़े हो जाते है। यह परम्परा वर्षों से चली आ रही है। मंगलवार को नाग पंचमी के अवसर पर सुबह दोनो गांव की महिलाये और पुरुष अपने अपने गांव के मंदिरों पर इकट्ठा हुई। पहले पूजा पाठ घण्टो चला। फिर इसके बाद कजरी गीत महिलाओं द्वारा गाया गया जो देर दोपहर तक चलता है। शाम करीब 4 बजे के बाद दोनो गांव की महिलाये और पुरुष दोनों गांवो के बीच नाले पर इकट्ठा हुई। दोनो गांव की महिलाओं की तरफ से फूहड़ गाली गलौज ( जो परम्परा का हिस्सा है ) शुरू गीत गाकर हुआ। गाली ऐसी की देखने सुनने वाले भी शर्म से सर झुका लेते है।
यह गाली दोनो तरफ से पुरुषों को उकसाने के लिए होती है। फिर शुरू होता है ईट पत्थर फेंकने का दौर। यह तब तक चलता है जब तक दोनो तरफ से किसी के सर से खून न निकल जाये। पहले काफी लोग चोटहिल हो जाते थे। इसमे सुरक्षा करने वाले पुलिस कर्मी भी घायल हो जाते थे। किन्तु इस बार फोर्स होने के कारण ढेला बाजी नही हो पाया। कुछ ढेला बाजी किये। दोनो तरफ फोर्स होने के कारण ढेला बाजी करने वाले भाग गये। महिलाओं द्वारा फुहड़ गीतों व कजरी गीत का आयोजन हुआ। बलुआ इंस्पेक्टर डॉ. आशीष मिश्रा भारी मात्रा में फोर्स व महिला फोर्स के साथ तैनात रहे।










