डांडिया स्टिक्स की खनक और भांगड़ा ने दर्शकों को किया अभिभूत
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने राष्ट्रीय शिल्प मेले में बांधा समां। तन पर घाघरा-चोली, धोती -कुर्ता-पगड़ी और चटकीले परिधान आधुनिकता संग परंपरा को सहेजने वाला साज तो जुगलबंदी के लिए कर्णप्रिय सुरीली आवाज। मस्ती का आलम में हर कोई भरपूर आनंद लेने को बेताब था। सुरीले गीतों पर किसी के होठ हिल रहे थे तो किसी के पांव थिरक रहे थे। चंद्रमा से उतर रही शीतलता को माहौल की गर्मी से चुनौती मिल रही तो खुले आसमान के नीचे सतरंगी चकाचौंध से रात जवां हो रही थी। शहरवासियों के लिए यह उत्साह व उल्लास भरा माहौल रविवार को खचाखच भरे शिल्प हाट के प्रागंण में देखने को मिला। मंच पर युवा गायिका शुभी पाण्डेय के स्वर गूंजे तो ढोलिडा ढोल धीमो, पंखिड़ा तू उड़ी जाजे, केसरियो रंग तने लाग्यो गीत पर डांडिया की छड़ियां आपस में टकराकर ताल का नया संसार रचने लगीं। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र , संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत आयोजित राष्ट्रीय शिल्प मेला की सातवीं सांस्कृतिक निशा में लोक कलाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अजय कुमार मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज, और भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ संजीव गुप्ता, ए. डी. जी., प्रयागराज, प्रोफेसर सत्यकाम वाइस चांसलर राजषी टंडन मुक्त विश्वविद्यालय व राम प्रकाश राय को अंग वस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने स्वागत उद्बोधन दिया।
भक्ति और भाव का संगम
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत प्रयागराज की उभरती गायिका शुभी पाण्डेय ने मनमोहक भजनों और गीतों से की। उन्होंने ‘बाजे रे मुरलिया बाजे’, ‘ओ जी हरि किट गए’, ‘रे मेरा मान कृष्ण नाम कहीं लीजिये’, ‘मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में’ और ‘प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे’ जैसे गीतों को पेश कर श्रोताओं से खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद, गजल गायक संतोष पाण्डेय ने ‘इस तरह मोहब्बत की शुरुआत कीजिए’, ‘साथ छूटेगा कैसे मेरा आपका’ और ‘मोहे आईने जग से लाज’ जैसी ग़ज़लों की प्रस्तुति दी, जिसने माहौल को रूमानी बना दिया।
शक्ति और शौर्य की प्रस्तुति
शिल्प मेले के मंच पर सिंजनी सरकार एवं साथी कलाकारों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा रावण पर युद्ध से पहले देवी शक्ति की पूजा के संकल्प पर आधारित भरतनाट्यम की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी हर लय और ताल पर दर्शकों ने जमकर तालियाँ बजाईं।
लोक नृत्यों का जलवा
इसके बाद विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की शृंखला शुरू हुई जिसने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। अमरेंद्र सिंह ने पंजाब का ओजपूर्ण भांगड़ा और जिंदुआ नृत्य प्रस्तुत किया इसके बाद नितिन दवे ने आकर्षक डांडिया नृत्य पेश कर खूब दर्शकों को झुमाया। शब्बीर सिद्धी एवं साथी कलाकारों ने उत्साह से भरपूर सिद्धी धमाल नृत्य की प्रस्तुति दी। तमिलनाडु से आए कलाकारों ने पारंपरिक अम्मन अट्टम नृत्य पेश किया वहीं, शरद अनुरागी ने वीर रस से भरी ‘कजली की लड़ाई’ को आल्हा के माध्यम से प्रस्तुत कर शौर्य की गाथा सुनाई। कार्यक्रम का संचालन प्रियांशु श्रीवास्तव ने किया।










