नए रिसीवर से सभी खुश लेकिन उन्हें भी हटाने की चल रही साजिश ? उच्च न्यायालय के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन?
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। श्री हनुमत निकेतन सिविल लाइंस के कर्मचारियों को 6 साल से नहीं मिला वेतन। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के सिविल लाइंस में स्थित श्री हनुमत निकेतन जिसे लोग हनुमान मंदिर के नाम जानते हैं वह लगातार विवादों से घिरता जा रहा है। यहां के लगभग तीन दर्जन से अधिक कर्मचारियों को 6 साल से वेतन नहीं दिया जा रहा है जिससे वह भूखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं तो दूसरी ओर यहां कोषाध्यक्ष रहे एक पर अनियमित किए जाने का आरोप लगा है और यहां के कुछ कर्मचारी उनके खिलाफ उच्च न्यायालय भी गए हैं जिस पर उनसे अपना पक्ष रखने के लिए निर्देशित किया गया है। लेकिन अब तक वह न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर सके। बताया जाता है कि कई साल पहले यहां कोषाध्यक्ष रहे पूर्व जज राजेश अग्रवाल ने एक ट्रस्टी दिनकर मिश्रा को को दान में आए पैसे का हेरा फेरी करते हुए पकड़ा था और आज वही उनका सबसे चहेता बना हुआ है।
आरोप है कि है कि पूर्व जज ने यहां से तिजोरी के साथ सोने चांदी के आभूषण कंप्यूटर और मंदिर में लगे समस्त कैमरा और समस्त दस्तावेज और कुछ नगदी कई अन्य सामान अपने साथ ले गए हैं उसी को लेकर यहां के लोग पहले जनपद न्यायालय गए जहां से उनका मामला खारिज कर दिया गया उसके बाद वह उच्च न्यायालय गए जहां न्यायालय ने पीड़ित पद को सुना और दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किया और उन्हें अपना पक्ष रखने का समय दिया लेकिन समय बीत जाने के बाद भी अब तक वह अपना जवाब दाखिल नहीं कर सके दूसरी ओर यहां के लोगों को परेशान करने के लिये तरह-तरह हथकंडे अपना रहे। बताया गया कि यहां पर जिसे चोरी में पकड़ा गया था जिसे लोग दिनकर मिश्रा के नाम से जानते हैं एसके दुबे जो अपने जीजा दिनकर मिश्रा को दिनकर मिश्रा बचाने के लिए तरह-तरह से हथकंडे अपना कर यहां काम कर रहे लोगों को परेशान कर रहा है। यहां रह रहे लोगों कहना था कि यहां पर रिसीवर एडीएम सिविल सप्लाई को बनाया गया है जिनकी देखरेख में यहां आए चंदे का हिसाब किताब रखा जा रहा है लेकिन उनकी ईमानदारी कुछ लोगों को रास नहीं आ रही है। यही कारण है कि उन्हें हटाने के लिए भी यहां तरह-तरह की साज़िश रची जा रही है। यहां रह रहे लोगों ने प्रशासन के अवसरों से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है जिससे कि मंदिर की अस्तित्व को बचाया जा सके।









