त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। दशाश्वमेध घाट पर दीपोत्सव की भव्य चमक, दीपावली को यूनेस्को मान्यता मिलने का हुआ उत्सव। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुरुवार की शाम दशाश्वमेध घाट पर दीपोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने के उपलक्ष्य में संगम तट दीपों की रौशनी से दैदीप्यमान हो उठा।
घाट पर हजारों दीप प्रज्वलित किए गए, जिनसे स्वास्तिक और यूनेस्को के प्रतीक चिह्न की आकर्षक आकृतियाँ निर्मित की गईं। दीपों से सजा घाट बेहद मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
इस अवसर पर महापौर गणेश केसरवानी ने दीप प्रज्ज्वलित करते हुए कहा, “दीपावली के विश्व स्तर पर मान्यता मिलने से भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ा है। दीपावली पर्व भगवान श्री राम जी द्वारा लंका विजय कर अयोध्या आगमन की स्मृति में मनाया जाता है। लगभग 550 वर्ष बाद अयोध्या में भगवान राम के नवनिर्माण मंदिर की स्थापना हुई और धर्मध्वजा फहराई गई। यही कारण है कि दीपावली हमारी संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। प्रयागराज में आयोजित यह दीपोत्सव हमारी समृद्ध परंपराओं का जीवंत प्रतीक है।”
केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने कहा, “एक ओर काशी–तमिल संगमम 4.0 का आयोजन चल रहा है और दूसरी ओर दीपावली का यूनेस्को की विश्व अमूर्त धरोहर सूची में शामिल होना यह एक सुखद संयोग है। यह हम सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण है।” अयोध्या और वाराणसी में चल रहे काशी तमिल संगमम के तहत वहाँ भी दीपोत्सव मनाया गया l
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और दीपोत्सव का आनंद लिया।










