त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। नारायण स्वरुप हॉस्पिटल की चिकित्सक टीम ने एक 60 वर्षीय महिला मरीज की जान बचाकर एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सही समय पर सही इलाज जीवनदायिनी साबित होता है।
मामला पुष्पा देवी (उम्र 60 वर्ष) पुत्री राजेश गुप्ता, निवासिनी : HOUSE NO. 246 जानसेनगंज, प्रयागराज, की है, जिनके प्राकृतिक दांत टूट कर गिर जाने के कारण परिवार वालों ने उनके लिए दांत के डॉक्टर द्वारा नकली दांत लगवाए गए थे। शुरू में यह कृत्रिम दांत सामान्य रूप से काम कर रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे ढीले पड़ने लगे। बीते दिनों भोजन करते समय अचानक नकली दांत मुंह से निकलकर खाने की नली (Esophagus) में फंस गया।
मरीज को अचानक तेज़ दर्द, सांस लेने में दिक्कत, उल्टी और गले में रुकावट जैसी गंभीर समस्या होने लगी। घरवाले घबराकर पहले अन्य जगह ले गए, लेकिन जब हालात बिगड़े तो तुरंत उन्हें नारायण स्वरुप हॉस्पिटल, प्रयागराज लाया गया।
हॉस्पिटल पहुँचने पर डॉक्टरों ने तुरंत एक्स-रे और एंडोस्कोपी जांच की, जिसमें स्पष्ट हुआ कि नकली दांत खाने की नली में फंसा हुआ है और जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। देर किए बिना डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक प्रक्रिया (दूरबीन द्वारा सर्जरी) करके बड़ी सावधानी से दांत को बाहर निकाला यह प्रक्रिया करने में लगभग 1 घंटे का समय लगा।
दूरबीन विधि द्वारा नकली दांत को डॉक्टर राजीव सिंह, वरिष्ठ एडवान्सड लैप्रोस्कोपिक सर्जन, यूरोलोजिस्ट, प्रोक्टोलोजिस्ट एवं इंडोस्कोपिस्ट, डॉक्टर आकाश शाह, डी एम गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट, डॉ अवनीश तिवारी एवं शिवांशु की टीम ने नकली दांत की एसोफेगस मुंह के रास्ते से सफलता पूर्वक बाहर किया, मरीज अब पूर्णता स्वस्थ है और सामान्य भोजन कर रहा है और अब खतरे से बाहर है।
डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि “मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। थोड़ी भी देर होती तो सांस की नली बंद होकर जान का खतरा हो सकता था। हमारी टीम ने सफलतापूर्वक एंडोस्कोपी द्वारा नकली दांत बाहर निकाल दिया और मरीज की जान बचाई।”
इस सफल ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य रूप से भोजन कर पा रही हैं।
जन-जागरूकता संदेश (डॉ राजीव सिंह)
• नकली दांत लगाने के बाद उनकी फिटिंग की नियमित जांच करवाना ज़रूरी है।
• ढीले दांत या दंत उपकरण को तुरंत दंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
• ऐसी आपात स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपायों में समय न गवाएँ, तुरंत नज़दीकी बड़े हॉस्पिटल में पहुँचें।










