ब्यूरो चीफ एस.के. सिंह की रिपोर्ट
बलिया। जनपद में उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष चिकित्सा एवं औषधि राज्य मंत्री दयालु मिश्रा इमरजेंसी के 50 वी वर्षी के अवसर पर काला दिवस सभा मे जनपद के अग्रवाल धर्म साला में आये हुए थे।
मंत्री ने कांग्रेस सरकार के 50 वर्ष पहले किये कारनामे पर प्रकाश डाल रहे थे इसी बीच मीडिया ने उनसे सवाल पूछ लिया मंत्री महोदय “आजादी से लेकर इमरजेंसी की याद दिलाने वाली जिला जेल बिना बनाये बन्द कर दिया गया” जो आपात काल मे हजारों सेनानीयो के बन्द होने की याद दिलाती है। मंत्री महोदय के पास जबा तो नही था “कान खुजलाना और मुस्कुराने के अलावे कुछ और नही”।
मंत्री जी के हंसी का राज क्या था
आपात काल की याद दिला कर आज के दौर का तुलनात्मक अध्ययन करना या बलिया के उन गरीब परिवारों को चिढाना जिनके परिजन किसी कारण जेल गए हैं। जिनसे मिलने के लिए मऊ या आजमगढ़ जेल जाना पड़ता है।
बिना जेल के लिए जमीन लिए और धन की व्यवस्था हुए ही जेल बन्द कर देना कही न कही सरकार की किरकिरी हो रही है। बलिया के भाजपा कार्यकर्ता भी व्यवस्था से काफी नाराज दिख रहे है लेकिन कहें तो किससे। सांप छुछुन्दर की स्थिति में भाजपाई और जनपद वासी फसें हुए हैं।
“मंत्री की हंसी पर मनोज तिवरी का वह गाना फिट बैठता है हीं हीं हस दिहले रिंकिया के पापा”










