‘राम की शक्तिपूजा’ में दिखा शक्ति मौलिक कल्पना का यथार्थ।

‘राम की शक्तिपूजा’ में दिखा शक्ति मौलिक कल्पना का यथार्थ।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट 

प्रयागराज। ‘राम की शक्तिपूजा’ में दिखा शक्ति मौलिक कल्पना का यथार्थ। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्ववाधान में एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत आयोजित चलो मन गंगा यमुना तीर के तहत शनिवार को संस्था माध्यम संस्थान (रंगमंडल) द्वारा महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की कालजई रचना “राम की शक्तिपूजा” का भव्य मंचन किया गया। ध्वनि व प्रकाश माध्यम से इस नाट्य मंचन का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. विनय श्रीवास्तव और प्रस्तुति वरिष्ठ निर्देशक डॉ. अशोक कुमार शुक्ल की थी। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की राम की शक्ति पूजा नामक रचना में राम के कुछ ऐसे मनोभाव देखने को मिलते हैं जो शायद रामायण में भी उल्लेखित नहीं हैं। इस कविता में उनके टूटते मनोबल को दर्शाया गया है। युद्ध के दौरान श्रीराम के रावण को बार-बार बाण मारने पर भी उनका वार खाली जाता है। राम के मन में बार-बार संशय उठता है, उनको लगता है वह यह युद्ध जीत नहीं पाएंगे। रावण के अट्टहास की उनके कानों में गूंजती ध्वनि उनकी आंखों से अश्रु के रूप में फूट पड़ती है। जामवंत, जिन्हें निराला कविता में जाम्बवान कहते हैं, राम की इस निराशा को दूर करते हैं। जामवंत राम को आराधन के बदले दृढ़ आराधन करने को कहते हैं। राम हनुमान से 108 नीलकमल लाने को कहते हैं और शक्ति की आराधना आरंभ करते हैं नौ दिनों की शक्ति पूजा की समाप्ति की ओर बढ़ते हुए जब राम अंतिम नीलकमल चढ़ाने के लिए हाथ आगे बढ़ाते हैं तब दुर्गा उनकी परीक्षा लेने के लिए एक नीलकमल चुपके से उठा लेती हैं। राम के हाथ कुछ नहीं लगता। इससे उनका ध्यान भंग हो जाता है और निराशा उन्हें घेर लेती है। इसपर वो शक्ति के चरणों में अपनी आँख चढ़ाने का निर्णय कर लेते हैं। जैसे ही वो तीर उठाते हैं, शक्ति प्रकट होती हैं और जय का आशीष देकर उनके शरीर में लीन हो जाती हैं।

मंच पर ब्रजेश त्रिपाठी (विभीषण), आर्यन (सूत्रधार), लवकुश भारतीय (हनुमान), विपिन गौड़ (जाम्बवान), हरि नारायण पांडेय (राम), कृष्णा यादव (लक्ष्मण) और दिव्या शुक्ला (दुर्गा) ने बेहतरीन अभिनय किया। साउंड रिकॉर्डिंग – अनुपम गुलवाड़ी, संगीत संयोजन – रिभू श्रीवास्तव, रूप सज्जा – संजय चौधरी ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में भजन गायक गणेश श्रीवास्त्व ने जय-जय जननी देवी, मेरा भोला बड़ा भोला भाला, जाही विधि राखे राम ताही विधि रहिए और ए हो गंगा मइया को प्रस्तुति देकर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरी। इसके बाद रेखा गौड़ ने झूला तारी सातो रे बहिनिया झुलवा लगाई के, गंगा जमुना सरस्वती का मेल बड़ा ही प्यार, तोहरो बालम कप्तान बा हो, गोरीया कहे बालम बरखा में ऊंची अटरिया चाही न तथा औरो महीनवा में बरसे ना बरसे फगुनवा में रंग रस रस बरसे की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। इसके बाद विशेष प्रस्तुति में चंडीगढ़ से आए विनोद पवार ने सारंगी वादन की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।

जबावी बिरहा में शोभालाल, श्रीराम सखा, शशिकला, इन्द्रजीत सिंह पटेल हनुमंत सिंह जवाहर लाल पाल ने बिरहा की प्रस्तुति दी l मुख्य अतिथि प्रोफेसर मनोज कुमार ( फ़िल्म एंड थिएटर इलाहाबाद विश्वविद्यालय) केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय ने सभी कलाकारो को अंगवस्त्र व पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन अमित मिश्रा ने किया।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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