वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने मोदी सरकार से की सख्त कार्रवाई की अपील
मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा की रिपोर्ट
मुरादाबाद। विवादित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर तत्काल प्रतिबंध की मांग। किसी भी समुदाय की धार्मिक या जातिगत भावनाओं को आहत करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनी रहे।
उत्तर प्रदेश, संजय सिंह। विवादित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के बीच वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने केंद्र की मोदी सरकार से इस फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने फिल्म के शीर्षक और कथ्य को एक विशेष समुदाय की धार्मिक व जातिगत भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए इसे सामाजिक सौहार्द के लिए घातक करार दिया।
राजेश खुराना ने कड़े शब्दों में कहा कि यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक है कि हाल के वर्षों में न केवल राजनीति बल्कि अब फिल्मों के माध्यम से भी ‘पंडित’ शब्द को घूसखोरी जैसे नकारात्मक संदर्भों से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इस प्रकार का चित्रण पूरे ब्राह्मण समाज की छवि को ठेस पहुंचाता है और समाज में गलत व भ्रामक संदेश फैलाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म का जातिसूचक शीर्षक जानबूझकर एक विशेष समुदाय को लक्षित करता है, जिससे जातिगत विद्वेष और सामाजिक तनाव को बढ़ावा मिलता है। यह न केवल धार्मिक व जातिगत भावनाओं को आहत करता है, बल्कि समाज में सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
श्री खुराना ने आगे कहा कि विवादित फिल्म के शीर्षक और कंटेंट से यह स्पष्ट होता है कि समाज में वैमनस्य फैलाने, शांति व्यवस्था भंग करने और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने के उद्देश्य से इस प्रकार की सामग्री प्रस्तुत की गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कंटेंट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नकारात्मकता फैलाने के प्रयासों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित इस फिल्म को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था, जिस पर मोदी सरकार ने संज्ञान लेते हुए संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म को फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का नाम तुरंत हटाने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल फिल्म का नाम हटाना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसे किसी भी कंटेंट के निर्माण पर रोक लगनी चाहिए, जो समाज में विद्वेष, वैमनस्य और अशांति फैलाने का कारण बने।
अंत में वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस प्रकार की विवादित फिल्मों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रतिबंध लगाया जाए तथा किसी भी समुदाय की धार्मिक या जातिगत भावनाओं को आहत करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनी रहे।










