त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। “मन लागो मेरो यार फकीरी में” से गूंज उठा नाद-ब्रह्म शिल्प मेला। लोकसंस्कृति, शास्त्रीय संगीत और जनआस्था के जीवंत संगम के रूप में सोमवार को नाद-ब्रह्म शिल्प मेला दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस मेले में दिनभर सांस्कृतिक गतिविधियों की सरस बयार बहती रही, वहीं संध्या होते-होते सुर, विचार और लोकहास्य से सजी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ भजन गायक ऋषि मिश्रा की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से हुआ। उन्होंने “साधो ऐसा ही गुरु भावे”, राग झिंझोटी में छोटा ख्याल “सगुन विचारो”, “कृपा सरोवर कमल मनोहर” तथा “अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरम” जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरीं। इसके पश्चात राहुल पाण्डेय ने “अंगना में निमिया लगाइब”, “विष्णु जब अवतार आपका”, “लागल संगम अस्ननवा” और “जब निकई समइया न जाना” गीतों से लोकभावना को स्वर दिया।
इसके बाद युवा शास्त्रीय एवं कबीर वाणी गायक विवेक विशाल ने संत कबीर की अमर वाणी से श्रोताओं को जोड़ा। “हमन है इश्क मस्ताना”, “कछु लेना न देना मगन रहना”, “दाग कहा से लागल चुनर में”, “हंसा ये पिंजरा नहीं तेरा” और “मन लागो मेरो यार फकीरी में” जैसे पदों की सशक्त प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंज उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आयोजित संगोष्ठी में “तीर्थराज प्रयाग : लोक आस्था, पर्यावरण एवं कर्तव्यबोध” विषय पर विद्वानों ने विचार रखे। प्रोफेसर मार्तंड सिंह ने कहा कि लोकआस्था जनविश्वास की रग-रग में समाई हुई है। जब मनुष्य प्रकृति की दैवीय शक्ति पर सहज विश्वास करता है, तभी वृषभ और नीलकंठ पक्षी में शिव के दर्शन होने लगते हैं। उन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक-संस्कार अत्यंत प्रबल होते हैं, किंतु मनुष्य संस्कारों का दास नहीं, उनका निर्माता भी है।
वहीं डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग लोकआस्था, पर्यावरण और कर्तव्यबोध का अनुपम संगम है, जहाँ त्रिवेणी में स्नान से पापमुक्ति और मोक्ष की कामना की जाती है। प्रयाग तपःस्थली और ऋषिक्षेत्र के रूप में भारतीय चेतना का केंद्र रहा है। कार्यक्रम के दौरान आयोजित नृत्य प्रतियोगिता में 18 प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोहा। वहीं जबावी बिरहा की प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कल होगा महानाट्य प्रस्तुति- केंद्र प्रेक्षागृह में माता अहिल्याबाई होल्कर की 300 वीं जयंती पर कर्मयोगिनी माता अहिल्या नाटक की प्रस्तुति शाम 6 बजे से होगा।










