गाँव की आत्मा गाय में बसती है, मोगली पलटन की कछुआ चाल रैली का संदेशा।

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देवेन्द्र कुमार जैन की रिपोर्ट

सीधी म. प्र.। ऋषिकेश फ़ाउण्डेशन की बाल टोली मोगली पलटन द्वारा “गाय हय ता गाँव हय” विषय को लेकर कछुआ चाल रैली आयोजित की गई। रैली ग्राम हनुमानगढ़ के स्व० श्री चन्द्रप्रताप तिवारी प्रतिमा स्थल से प्रारम्भ हुई और मुख्य सड़क से गुज़रती हुई गाँव के दूसरे छोर पर समाप्त हुई। रैली में शामिल बच्चे जबरदस्त उत्साह से गाय हय ता, गाँव हय माटी कहय नारिआय के, गोबर नाबा गाय के गोबर ना होय मोहर आय,गाय ना होय धरोहर आय, सेवा करबे गाय के, रोजगार पउबे धाय के नारे लगातार लगाते हुए चल रहे थे। ग्रामवासी घरों से निकलकर बाल टोली का उत्साहवर्धन करते नज़र आए। रैली के दौरान गाय की चिट्ठी भी बाँटी जा रही थी, ताकि इस रैली का संदेश ग्रामवासियों तक पहुँच सके कि गाय उनसे क्या कहना चाहती है।

आज गाँव और किसान की सबसे बड़ी समस्या आवारा पशु बन चुके हैं। 1992 के उदारवाद के बाद आर्थिक विकास का जो मॉडल भारत में अपनाया गया है उसमें गाँव और किसान हाशिये पर ढकेल दिए गए हैं। गाँव पर शहर और शहर पर महानगर की निर्भरता का जो पिरामिड था वो अब शीर्षासन पर खड़ा हो गया है। गाँव में दूध का उत्पादन घट रहा है और दूसरी ओर शहर में दूध की माँग बढ़ती जा रही है। परिणामतः मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों का एक विशाल काला बाजार खड़ा हो गया है। यही हाल सब्जी को लेकर है; अब शहर की मंडी से गाँव के घरों में जहरीली सब्जी आ रही है, और दूसरी तरफ़ अरबों रुपए का आर्गेनिक ब्रांडिंग का बाजार महानगरों में पसर रहा है। अमेजन और फ्लिपकार्ट देश के किसी भी कोने में मिलने वाला उत्पाद गाँव के हर टोले-मोहल्ले में पहुँचा रहे हैं, और गाँव का युवक बम्बई में रोज़ी कमाने नाला किनारे झुग्गी-बस्ती में रह रहा है।

इन सभी समस्याओं का समग्र समाधान गाय है। यदि गाय को ग्रामीण विकास मॉडल के केंद्र में रखा जाये तो गाँव मजबूत होंगे, और गाँव मजबूत होंगे तो जड़ें मजबूत होंगी। ग्रामीण पलायन रुकेगा, शहरों पर बढ़ता बोझ घटेगा, आवारा पशुओं की समस्या का समाधान होगा। मोगली पलटन का मानना है कि यदि भारत की आत्मा गांव में बसती है, तो गाँव की आत्मा गाय में बसती है।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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