‘राजा लोहगुंडी’ की वीर गाथा के साथ जनजातीय उत्सव का हुआ समापन।

'राजा लोहगुंडी' की वीर गाथा के साथ जनजातीय उत्सव का हुआ समापन।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

प्रयागराज। ‘राजा लोहगुंडी’ की वीर गाथा के साथ जनजातीय उत्सव का हुआ समापन। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय उत्सव का समापन सोमवार को गोंड जनजाति की वीर गाथा पर आधारित भव्य नृत्य-नाट्य ‘राजा लोहगुंडी’ की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ। गोंड संस्कृति की लोक परंपराओं, रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोक संगीत और रोमांचक युद्ध दृश्यों से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। वीरता, प्रेम और विजय की इस लोकगाथा को कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय और मनमोहक नृत्य के माध्यम से जीवंत कर प्रेक्षागृह को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आशुतोष सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज, विशिष्ट अतिथि अंजना बनर्जी, निदेशक, सुर ओ संगीत नृत्य अकादमी, प्रयागराज तथा केन्द्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।


लगभग एक घंटे 20 मिनट की इस प्रस्तुति का निर्देशन सतीश व्याम ने किया तथा इसकी पटकथा योगेश तिवारी ने लिखी। नृत्य-नाट्य में गोंडवाना के वीर शासक राजा लोहगुंडी की शौर्यगाथा को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार दुष्ट एवं जादुई शक्तियों से संपन्न राजा रामदरबाई रानी हिरोली का अपहरण कर लेता है। इसके बाद राजा लोहगुंडी अपनी बुद्धिमत्ता, साहस और जादुई तलवार के बल पर रामदरबाई को युद्ध में पराजित कर रानी को सकुशल वापस लाते हैं और अपने राज्य की रक्षा करते हैं। नाटक में पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लोक गीतों और नृत्यों का ऐसा सामंजस्य था कि पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

नाटक में कुल 11 दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें गोंड जनजाति की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का आकर्षक समन्वय देखने को मिला। प्रस्तुति में 50 से अधिक लोक कलाकारों ने भाग लिया और अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। पारंपरिक संगीत का संयोजन एच. अनिल सिंह ने किया, जिसने नाटक को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक ने मुख्य अतिथि एवं नाट्य निर्देशक को पौधा व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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