जो संविधान को नहीं मानता वह देशद्रोही : शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती
त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। व्यापारियों ने पूरे जोश से मनाया 77 वें गणतंत्र का जश्न, वंदे मातरम के 150 साल, शंकराचार्य के नेतृत्व में भव्य तिरंगा यात्रा। शहर पश्चिम व्यापारी महासंघ, नमस्ते भारत परिवार व सुलेम सरायं व्यापार मंडल के संयुक्त तत्वाधान में विगत 26 वर्षों के भांति इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस की 77 वीं वर्षगांठ बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
झंडा काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज व भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता द्वारा फहराया गया
राष्ट्रगीतो से ओत प्रोत इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में शहर के जाने माने समाजसेवी, क्षेत्रीय पार्षदगण, अधिवक्तागण, डाक्टर्स, व्यापारी नेताओं समेत व्यापारियों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ भाग लिया, संस्था के सदस्यों ने शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का चरण पादुका पूजन कर व भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता को शाल, पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महराज 77 वें गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मी बाई जैसे लाखों क्रांतिकारियों के बलिदान के बाद यह आजदी मिली, आज का दिन गणतंत्र (संविधान ) का दिन है। आज से 77 वर्ष पूर्व गुलामी की बेड़ियां जकड़ा हुआ यह भारत जहाँ 599872 गाँव में स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति की चिंगारी, जहां कितने लोग ज्ञात-अज्ञात जिन्होंने अपना बलिदान इस मातृभूमि की आजादी के लिए जहां अंग्रेजों का अनाचार दुराचार जहां लाइनों में खड़ा कर राष्ट्र भक्तों पर गोलियों की बौछारें की जाती थी। अनेक तरह के प्रताड़नाओं के बावजूद भारत के क्रांतिकारी वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बलिदान दिया, संघर्ष हुआ की अपने देश का संविधान होगा, अपने देश के लोग सत्ता पर होंगे, भारत जो चाहेगा वह करेगा लेकिन आजादी के 70 वर्षों के बाद भी आज भी भारत को जो आजादी चाहिए प्राय: वह आजादी हासिल नहीं है। आज ही के दिन हमारा संविधान लागू हुआ था लेकिन जो लक्ष्य था वह अभी बहुत कुछ अधूरा है, उसी स्मृति में हम यह गणतंत्र दिवस मानते हैं कि जो कुछ अधूरा है उसको पूरा करेंगे, एक रहेंगे, संगठित रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे भारत अखंड रहेगा। जो संविधान को नहीं मानता वह देश द्रोही है।
महाराज ने आगे कहा कि विषम परिस्थितियों के बावजूद जहां आज भी किसान अपना संघर्ष करता है लेकिन सही मूल्य किसानों को नहीं मिलता। जहां एक तरफ जल सेना, थल सेना देशद्रोहियों से लड़ते हुए आतंकवादियों के सेंटरों को नेस्तनाबूत कर रहे हैं। इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर हमें स्वदेशी का उपयोग करने का संकल्प लेना चाहिए। पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक एक भारत, समृद्ध भारत, शिक्षित भारत, दुनिया की महाशक्ति बने भारत ऐसी मंगलकामना करता हूं।

वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज की अगुवाई में किया गया। शंकराचार्य ने कहा कि वंदे मातरम गीत ने देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया है। यह गीत हमें एकता, प्रेम और त्याग का संदेश देता है।
तिरंगा यात्रा में डीजे, पाइप बैंड, घोड़ा व बड़ी संख्या में स्कूली छात्रों, व्यापारी, क्षेत्रीय नागरिक, भारत माता की जय, जय हिंद, वंदेमातरम के जयकारों के साथ सुलेम सरायं से उठकर जयंतीपुर, प्रीतमनगर होते हुए मुख्यालय पहुंच कर समाप्त हुई।
कार्यक्रम का संचालन सह संयोजक व प्रांतीय महामंत्री हिमांशु निक्की गुप्ता ने किया व अध्यक्षता संयोजक व प्रांतीय अध्यक्ष नरेन्द्र खेड़ा मान्टू ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रुप से पूर्व मंत्री, विधायक सिध्दार्थ नाथ सिंह, दिनेश सिंह, धनजंय सिंह, अतुल केसरवानी, पीयूष जयसवाल, राजेश गुप्ता, गुलशन अरोरा, अंकुर रस्तोगी, सुनील केसरवानी, मुकेश टोटल, सोनू गुप्ता, नीलू मिश्रा, फय्याज अहमद, विरेंद्र केसरवानी, सागर ग्रोवर, निरंकार साहू, राकेश केसरवानी आदि उपस्थित रहे।










