सावन माह का प्रथम सोमवार तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के जन्म दिन पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा देव वृक्ष बरगद का वृक्षारोपण हुआ।

सावन माह का प्रथम सोमवार तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के जन्म दिन पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा देव वृक्ष बरगद का वृक्षारोपण हुआ।

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सूर्यगढ़ा, लखीसराय, बिहार। सावन माह का प्रथम सोमवार तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के जन्म दिन पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा देव वृक्ष बरगद का वृक्षारोपण हुआ। वृक्षारोपण का नेतृत्व संत कुमार ने किया। पर्यावरणविद नवीन निराला ने वृक्षारोपण में सहयोग किया। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक, पर्यावरण भारती के संस्थापक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा–” भगवान भोलेनाथ की पूजा वास्तव में प्रकृति पूजन है “। शिव पुराण के अनुसार मानव कल्याण हेतु भोलेनाथ ने विषपान सावन माह में ही किया था। अतः संसार के शिवभक्त सावन माह में भगवान भोलेनाथ को गंगाजल, बेलपत्र, शमि के पत्र- पुष्प, धतूरा, अकवन के पुष्प, भांग इत्यादि अर्पित कर के पूजन करते हैं। बिल्ववृक्ष को पृथ्वी पर कल्पवृक्ष माना गया है। इसके 3 पत्ते ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप है। स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष के रूप में जन्म लिया था। अतः बेलपत्र भोलेनाथ पर अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं।

भोलेनाथ सर्वशक्तिमान, दाता, विधाता, गुणों का भंडार, आनंद के सागर तथा अखंड दानी हैं। उनका भंडार कभी खाली नहीं होता है। वे सदा शान्त रहते हैं। वे शान्ति के सागर हैं।
भोलेनाथ प्रकृति या पर्यावरण के देवता हैं। उनके गले में विषधर नाग सर्प है, कान में बिच्छू का कुंडल है। उनको महँगे सामान नहीं चाहिए। वे भाँग, धतूरा, बेलपत्र से खुश रहते हैं। शिवलिंग मिट्टी और पत्थर के होते हैं। उनका आवास कैलाश पर्वत है। वे श्मशानघाट में भी निवास करते हैं। इस तरह भोलेनाथ पर्यावरण के प्रतीक हैं।

राम बिलास शाण्डिल्य ने बताया कि 3 अगस्त 1886 को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी जिला अन्तर्गत चिरगाँव में हुआ था। उनके पिता जी सेठ राम चरण गुप्त और माता जी श्रीमति कौशल्या देवी थीं। उनके साहित्यिक गुरू महावीर प्रसाद द्विवेदी थे। उनकी कवितायें स्वतंत्रता आंदोलन में प्रभावशाली सिद्ध हुआ। उसमें ” भारत- भारती ” एक था। अतः महात्मा गाँधी ने उन्हें राष्ट्रकवि की पदवी दिये। 1952 में उनको राज्य सभा सांसद बनाया गया। 1954 में भारत सरकार ने उन्हें ” पद्म भूषण ” से सम्मानित किये। उनका देहावसान 12 दिसंबर 1964 को हुआ। ऐसे सुअवसर पर देव वृक्ष बरगद का वृक्षारोपण पुनीत कार्य है।

वृक्षारोपण कार्यक्रम में संत कुमार, नवीन निराला, राम बिलास शाण्डिल्य, सोनी गुप्ता, आयूष कुमार, पीयूष कुमार, बिट्टू कुमार, शिवम पटेल इत्यादि ने भाग लिए।

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Author: AT Samachar

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