दीनदयाल उद्यान में कार्यशाला, सूखे पत्ते और सब्जी के कचरे से खाद बनाने की विधि बताई
धर्मेंद्र प्रजापति की रिपोर्ट
चंदौली। पड़ाव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान में सोमवार को विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अनुभवी मालीजनों ने पौधप्रेमियों को बागवानी तकनीकों और जैविक खाद निर्माण के तरीके सिखाए।

प्रशिक्षकों ने बताया कि वर्षा ऋतु पौधों की वृद्धि के लिए सबसे उपयुक्त होती है। उन्होंने कम्पोस्ट खाद बनाने की प्रैक्टिकल जानकारी दी। इसमें गड्ढा बनाकर सूखे पत्ते, सब्जियों का कचरा और 100-200 ग्राम यूरिया मिलाकर रखने से उत्तम जैविक खाद तैयार होती है।
कार्यशाला में केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) बनाने की विधि भी समझाई गई। केंचुए मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों को प्राकृतिक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। धान की भूसी के प्रयोग से मिट्टी की नमी और तापमान संतुलित रहता है।

गमलों के उचित उपयोग के लिए भी टिप्स दिए गए। टूटे गमलों के टुकड़ों को नए गमलों के छिद्र पर रखकर जल निकासी बेहतर की जा सकती है। कोकोपीट, रेत और मिट्टी का संतुलित मिश्रण पौधों की वृद्धि में सहायक होता है।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पौधप्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और घरों में हरियाली बढ़ाने के प्रति जागरूकता फैलाना था।










