समतामूलक समाज निर्माण के लिए विषमता मूलक जो व्यवस्थाएं है उससे मुक्त होना होगा।

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जातिवाद, अस्पृश्यतामुक्त भारत का निर्माण की शुरुआत स्वयं से करनी होगी

त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

जसरा प्रयागराज। आहों से पत्थर पिघलेगा इस धोखे में मत रहना, तुम्हे कहीं इंसाफ मिलेगा इस धोखे में मत रहना, भारत के जर्रे जर्रे में बहुजनों का अपना भी एक हिस्सा है, बुला बुला कर कोई देगा इस धोखे में मत रहना उक्त बातें डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने घूरपुर थानान्तर्गत ग्रामसभा जसरा गांव में शिक्षक दिवस पर शिक्षक दिवस से पूना करार दिवस 24 सितम्बर तक महिलाओं के नेतृत्व में एक अभियान के रूप में बारा विधानसभा के प्रत्येक गाँवो में जाएंगे। शुक्रवार को जसरा ग्रामसभा में “छुआछूत मुक्त भारत का 1947 का सपना क्या 2047 में साकार होगा ? विषयक रैली का शुभारम्भ किया।

आईपी रामबृज ने बताया कि अम्बेडकरवादी विचारधारा के लोगो के लिए उपरोक्त लाइने है जो कह रही हैं कि इस देश मे हिस्सा तो 85 प्रतिशत बहुजनों का भी है लेकिन जो सामंतवादी सरकार है वो बहुजनों का हिस्सा देने वाली नही है। इसलिए संघर्ष करो वरना ये नाम लेंगे राष्ट्रवाद का और कार्य करेंगे पक्षपात का। धर्म का नाम लेकर ये देश का संविधान तो बदलेंगे ही साथ ही आपके अधिकार भी। वर्तमान परिवेश की जटिलता में सिर्फ एक ही विकल्प हैं संघर्ष से अम्बेडकरवाद की ओर बढ़ो।

आईपी रामबृज ने आगे बताया कि हम अधिकारों को लेकर अपनी जिंदगी कैसे जिये यह हमें तय करना है। समतामूलक समाज निर्माण के लिए जो विषमता मूलक व्यवस्थाएं है उससे मुक्त होना होगा। समाज मे भेदभाव खत्म तभी होगा जब इसकी शुरुआत हम स्वयं से करेंगे।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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