प्रयागराज। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में दावे देरी के कारण खारिज करना नैसर्गिक नहीं हाईकोर्ट।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल देरी के आधार पर बिना कारणों पर विचार किये “मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना” के तहत दावे खारिज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
याचीगण के अधिवक्ता अजित कुमार श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, कमल कुमार सिंह के अपील को सुनते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा है कि भले ही योजना में दवा दाखिल करने की अधिकतम समय सीमा 75 दिन निर्धारित हो, लेकिन यदि देरी कर पीछे उचित कारण हो तो अधिकारियों को चाहिए कि वे उन पर विचार करें।
बस्ती निवासी माला देवी, गायत्री देवी, सरस्वती देवी तथा शिवकुमारी की याचिकाओं को निर्धारित करते हुए कोर्ट ने कहा, यदि देरी के कारणों पर विचार ही नहीं किया जाता तो यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। हर आवेदन को यह अधिकार है कि उसे अपनी देरी का स्पष्टीकरण देने का अवसर मिले। याचीगण उन किसानों के स्वजन है जो अब दुनिया में नहीं है। उनके दावे सिर्फ इस आधार पर खारिज कर दिए गए कि वे हादसे के 75 दिन बाद दाखिल किए गए। कोर्ट की जानकारी में यह तथ्य सामने लाया गया कि योजना के खंड -10 के तहत यह प्रविधान है कि दावा संबंधित तहसील कार्यालय में 45 दिनों के भीतर पंजीकृत किया जाना चाहिए। संबंधित प्राधिकरण को अवधि को एक महीने तक बढ़ाने का अधिकार होगा, लेकिन किसी भी स्थिति में अवधि को 75 दिनों से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।










