संतान का अपने माता- पिता का भरण-पोषण करना विधिक दायित्व है- पूर्णिमा प्राजंल।

संतान का अपने माता- पिता का भरण-पोषण करना विधिक दायित्व है- पूर्णिमा प्राजंल।

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन

चायल /कौशाम्बी। संतान का अपने माता- पिता का भरण-पोषण करना विधिक दायित्व है- पूर्णिमा प्राजंल। सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी द्वारा माता-पिता के अधिकार एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम- 2007 विषय के सम्बन्ध में जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में ग्राम कसेन्दा खास , तहसील चायल कौशाम्बी में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में अपर जिला जज/ सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी पूर्णिमा प्रांजल द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं, अपराध से पीड़ितों के लिए क्षतिपूर्ति योजनाओ, पीड़ितों द्वारा क्षतिपूर्ति प्राप्त करने हेतु प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अपने छोटे-छोटे मुकदमों का समाधान वैकल्पिक विवाद समाधान पद्धति के जरिए करें।उन्होंने कहा कि वृद्धजनों को कोई समस्या हो तो वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जाकर या तहसील स्तर पर बने लीगल एड क्लीनिक में कार्यरत पीएलवी से संपर्क कर अपनी शिकायती/आवेदन दे सकते हैं। यह भी कहा कि संतान का अपने माता- पिता का भरण-पोषण करना विधिक दायित्व है, ऐसा न करने पर 03 माह का कारावास या 05 हजार जुर्माना या दोनों हो सकता है। तीन लाख सालाना से कम आय वालों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है, जिसके तहत मुकदमा से जुड़ा सारा खर्च विधिक सेवा प्राधिकरण वहन करता है। इसके साथ ही प्राधिकरण द्वारा वैकल्पिक विवाद समाधान पद्धति के तहत सुलह समझौते के लायक विवादों के समाधान के लिए समय-समय पर लोक अदालत का भी आयोजन किया जाता है। किन्हीं भी सरकारी योजनाओं के लाभ में आने वाली किसी भी समस्या के समाधान के लिए भी आप हमारे पीएलवी से या कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त राष्ट्रीय, राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त सेवाओं और योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

संतान का अपने माता- पिता का भरण-पोषण करना विधिक दायित्व है- पूर्णिमा प्राजंल।
संतान का अपने माता- पिता का भरण-पोषण करना विधिक दायित्व है- पूर्णिमा प्राजंल।

 

कार्यक्रम में डॉ. नरेन्द्र दिवाकर द्वारा वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सम्मेलनों अभिसमयों, उपलब्ध प्रावधानों, भारतीय संविधान, व्यक्तिगत विधियों, दण्ड प्रक्रिया संहिता, माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम-2007 में दिए गए प्रावधानों व वरिष्ठ नागरिकों के बारे में सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और उनको मिलने वाली सहूलियतों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।तहसीलदार, चायल पुष्पेन्द्र गौतम द्वारा किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए तहसील में स्थित लीगल एड क्लीनिक में आकर या उनसे संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं या फिर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कई गंभीर बीमारियों के लिए भी सरकार द्वारा सांसद, विधायक व विधान परिषद सदस्य आदि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से दी जाने वाली सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान किया। पीएलवी अमरदीप द्वारा राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित योजना, चाइल्ड लाइन नंबर 1098 और महिला हेल्पलाइन नंबर 181 के बारे में जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम में अपर जिला जज/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी पूर्णिमा प्रांजल, तहसीलदार,चायल पुष्पेंद्र गौतम, हल्का लेखपाल योगेंद्र सिंह, ग्राम प्रधान सुखलाल यादव, समाजसेवी तलत अजीम, मानसिंह, पी.एल.वी. डॉ. नरेंद्र दिवाकर, अमरदीप दिवाकर सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण वासी उपस्थित रहे।

AT Samachar
Author: AT Samachar

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai