त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट
प्रयागराज। कांशीराम की राजनैतिक विचारधारा से ही बहुजन समाज बन सकता है देश का शासक। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक बहुजन नायक कांशीराम कैडर देते वक्त कहते थे जिस समाज की गैर-राजनीतिक जड़े मज़बूत नहीं होती हैं, उस समाज की राजनीति कामयाब नहीं हो सकती। इसलिए मुझे दबे-कुचले समाज की गैर-राजनीतिक जड़ों को मज़बूत करना चाहिए और जब मैं जड़े देखने लगा तो मुझे जड़े ही नज़र नहीं आईं तो मुझे लगा ये समाज ही बिना जड़ के है। पहले तो जड़े बनानी होंगी फिर जड़ों को मज़बूत करना होगा और फिर उस मजबूती का सहारा लेकर तब हमें राजनीति के बारे में सोचना चाहिए आगे बढ़ना चाहिए।
बसपा संस्थापक कांशीराम कहते थे कि मेरी जिंदगी का बहुत सारा समय समाज की गैर-राजनीतिक जड़ों को मज़बूत करने में लगा दिया। उसमें ‘बामसेफ’ नाम का एक संगठन बनाकर दबे-कुचले समाज के जो पढ़े-लिखे कर्मचारी थे, उनको संगठित किया और उनको संगठित करके दिमाग़, हुनर और पैसा ये तीन किस्म की ग़ैर-राजनीतिक जड़ों को बनाया और मज़बूत किया तो मुझे ऐसा लगा कि ये मूवमेंट को कामयाब बनाने के लिए दिमाग़ का होना जरूरी है, हुनर का होना जरूरी है और पैसे का होना जरूरी है तो इस तरह से तीन किस्म के जेनरेटर बनाकर मैने मूवमेंट बढ़ाने की कोशिश की।
बहुजन समाज के बौद्धिक वर्ग का कहना है कि बीएसपी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मान्यवर कांशीराम साहब की वैचारिकी बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के स्थान पर उसे बदलकर जैसे सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय किया वैसे ही अनुसूचित जाति की एक उपजाति जाटव और पिछड़े वर्ग की एक उपजाति यादव के विरुद्ध एक सोची समझी रणनीति के तहत एंटी जाटव और एंटी यादव की जातियों का ध्रुवीकरण करके बहुजन समाज जो संगठित होकर वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था का हुक्मरान व शासक बनने की चाह को अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा और उसकी थिंक टैंक आरएसएस ने उसे छिन्न भिन्न कर दिया। विगत दो दशक के दौरान बीएसपी और सपा के समानांतर उत्तर प्रदेश में दर्जनों क्षेत्रीय दलों का उद्भव हुआ और उन्हीं दलों से ज्यादातर सांसद और विधायक निर्वाचित होकर सांप्रदायिक पार्टी भाजपा को प्रत्यक्ष समर्थन कर डेढ़ दशक से सरकार बना रहे हैं। बीएसपी प्रमुख 2012 से नई रणनीति के तहत दर्जनों राज्य स्तरीय और केन्द्रीय स्तर पर क्रमशः लखनऊ और दिल्ली में सर्व समाज को जोड़कर सेक्टर बूथ मजबूत कर बीएसपी प्रमुख को यूपी का पांचवीं बार का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बनाने का दिवास्वप्न टूटते हुए नजर आ रहा है। देखा जाय तो बीएसपी का 2012 से लगातार वोट प्रतिशत और जनाधार घटता रहा चला आ रहा है।
बहुजन समाज के बौद्धिक वर्गों का कहना है कि बीएसपी में एक जाति के अधिनायकवाद को खत्म करना होगा और सामाजिक या कहे नैसर्गिक न्याय के आधार पर पार्टी में सभी जातियों का प्रतिनिधित्व देते हुए बूथों से लेकर मुख्य मण्डल प्रभारियों तक पदाधिकारी बनाना होगा और विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी सामाजिक न्याय के आधार पर टिकट देना होगा। निश्चित ही इस प्रकार से बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के तहत बहुजन समाज देश का हुक्मरान बन सकता है।










