नाटक सारी रात में दिखी स्त्री के अंतर्मन की यात्रा।

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त्रिभुवन नाथ शर्मा की रिपोर्ट

 

प्रयागराज।  ‘रात, सारी रात जागता रहा मैं अविचल अनवरत अनिद्रा से भरा अपलक’ इस पंक्ति के इर्द-गिर्द घुमते हुए बादल सरकार द्वारा लिखित नाटक ‘सारी रात’ का मंचन शनिवार शाम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित 6 दिवसीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन केंद्र प्रेक्षागृह में किया गया। रंग चक्र प्रयागराज की ओर से मंचित इस नाटक के लेखक बादल सरकार हैं, और निर्देशन गौरव शर्मा ने दिया है।  नाटक की कहानी बरसात की एक रात की कहानी है, जिसमें सैर को निकले पति- पत्नी रास्ता भूल जाते हैं और बारिश से बचने के लिए एक सुनसान घर में शरण लेते है जहां अचानक एक वृद्ध व्यक्ति प्रकट होता है जो अपने आप को उस घर का मालिक बताता है और इस विवाहित जोड़े की आवभगत में जुड़ जाता है।

पुरूष एक सामान्य व्यक्ति है जिसे भावनाओं की सूक्ष्मता की जटिलता आसानी से समझ नहीं आती, वहीं स्त्री अति कल्पनाशील है वह प्रेम को सामान्य स्थिति से हटकर देखती है। अपनी सोच सोच में वह रंजन नामक व्यक्ति की कल्पना कर लेती है, और रंजन को पाना चाहती है।

रंजन को पाने के लिए वह अपना सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाती है। स्त्री को रंजन उस बूढ़े व्यक्ति में दिख जाता है। जैसे-जैसे रात बीतती है वृद्ध दोनों की मनोस्थिति को पहचान जाता है।

नाटक में तीन पात्रों के जरिये स्त्री जीवन की व्यथा को दिखाया गया। स्त्री पात्र जहां इस भीड़ भरी दुनिया में भी खुद को अकेला पाती है, सारी रात वह अपनेपन की तलाश करती रहती है लेकिन जिंदगी में प्यार की कमी उसे हमेशा खलती है। वह चाहती है कि कोई उसे सुने, उसके दिल की आवाज को सुने। वह बताना चाहती है कि वह भी एक इंसान है जिसकी इच्छाएं और आकांक्षाएं हैं। यह नाटक इन तीन चरित्रों के वार्तालाप के रूप मे दर्शको के सामने आता है। जिसके दौरान उस वृद्ध की वजह से, प्यारा नोक-झोंक भरा और पुख्ता दिखने वाले इस नवविवाहित जोड़े के आपसी संबंधो का अंतद्र्वंद्व बाहर आता है। शुरुआत के आधे घंटे तक लगातार दर्शकों के मन में यह रोमांच बना रहता है कि अगले दृश्य में क्या होगा? अजीब वेष-भूषा और शक्ल वाला यह वृद्ध व्यक्ति कौन है? यह एक कल्पना है या रोमांच कायम रखने के लिए किया गया एक निर्देशकीय प्रयास… लेकिन नाटक के दूसरे आधे घंटे में सब स्पष्ट हो जाता है। नाटक में लाइटिंग और पानी की मदद से बारिश का सीन बहुत ही शानदार तरीके से क्रिएट किया गया। इस तरह यह नाटक तीनों चरित्रों के आपसी वार्तालाप के रूप में रहस्य मय स्वरूप में दर्शकों के सामने आता है।

वास्तविकता और काल्पनिकता के बीच हिचकोले लेता यह वृद्ध चरित्र अलग- अलग समय में अलग-अलग भूमिका निभाता है। कभी वो एक मेजबान है तो कभी एक औरत का काल्पनिक प्रेमी जिसमे वो सब कुछ है ,जो नाटक में मौजूद स्त्री एक पति से चाहती है। यह प्रेमी एक पत्नी की वैसी आकांक्षाओं की उपज है जो उसके सीधे साधे पति की समझ में ही नहीं आता। नाटक की खासियत यह है कि निर्देशक और नाटककार दोनों ने ही सही और गलत की रेखा नहीं खींची है।

नाटक के मुख्य पात्रों में सूर्या सिंह परिहार, सत्यम तिवारी, निखिल मौर्य के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। संगीत संचालन शिवम प्रताप सिंह तथा मंच निर्माण अभिशेक शिवम यादव, हेमंत सिंह, सौरव तिवारी ने किया। इस मौके पर काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

AT Samachar
Author: AT Samachar

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